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​वाराणसी: पानी के संकट पर सवाल पूछना पड़ा महंगा, नगर निगम के बेलगाम ऑपरेटर ने राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के पदाधिकारियों से की अभद्रता

 सोन की आवाज न्यूज़ संवाददाता नवीन कुमार यादव की रपोर्ट


रामनगर, वाराणसी (23 मई 2026):
रामनगर स्थित बाल गृह सुधार के पास पानी की टंकी का ऑपरेटर इन दिनों अपनी मनमानी और गुंडागर्दी के कारण चर्चा में है। पिछले कई दिनों से क्षेत्र में पानी की भीषण किल्लत है और जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। लेकिन जनता की समस्या सुलझाने के बजाय नगर निगम का यह ठेका कर्मचारी लगातार बदतमीजी पर उतारू है। ताजा मामला राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी का है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​क्रमवार घटनाक्रम:

​पहली घटना (रोशन सिंह के साथ): 22 मई की शाम करीब 4:00 बजे, जब वाराणसी के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष रोशन सिंह पानी न आने की समस्या जानने टंकी पर गए, तो ऑपरेटर ने गैर-जिम्मेदाराना लहजे में कहा, "मुझे नहीं पता, जो पता करना है नगर निगम से जाकर पता करो।" जब उन्हें जिम्मेदारी का अहसास कराया गया, तो वह मूछों पर ताव देते हुए बदतमीजी पर उतर आया और खुली चुनौती दी कि— "जो करना है कर लो, जहां शिकायत करनी है कर दो, और खबर भी बना दो!"

​दूसरी घटना (शेख टीपू सुल्तान जी के साथ): इस घटना की सूचना मिलते ही मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष शेख टीपू सुल्तान खुद मौके पर पहुंचे। जब वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष शेख टीपू सुल्तान जी ने उपरोक्त प्रकरण के विषय में ऑपरेटर से पूरी जानकारी मांगनी चाही, तो उस बेलगाम कर्मचारी के तेवर और बढ़ गए। उसने अपनी पुरानी ढीटता दोहराते हुए शेख टीपू सुल्तान जी के साथ भी बेहद अभद्र व्यवहार किया और मूछों पर ताव देते हुए कहा— "मुझे नहीं पता, जो करना है कर लो।"

​सरकारी व्यवस्था पर गहराता संकट और ठेकेदार की शह

​संगठन के दो सम्मानित वरिष्ठ जिला उपाध्यक्षों के साथ लगातार हुई यह बदसलूकी साफ दर्शाती है कि नगर निगम के ठेकेदारों द्वारा रखे गए इन कर्मचारियों को न तो जनता की तकलीफों से कोई सरोकार है और न ही कानून या प्रशासन का कोई डर है। ऑपरेटर का यह बेखौफ अंदाज इशारा करता है कि उसे संबंधित ठेकेदार या विभागीय अधिकारियों का पूरा संरक्षण प्राप्त है।

​संगठन में भारी रोष, आंदोलन की चेतावनी

​एक तरफ क्षेत्र की जनता पानी की समस्या से बेहाल है, दूसरी तरफ सरकारी संपत्ति पर तैनात ऑपरेटर अपनी मर्जी का मालिक बना बैठा है। इस घटना के बाद से राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग और स्थानीय मीडियाकर्मियों में गहरा आक्रोश है।

​संगठन की मुख्य मांगें:

​यदि 24 घंटे के भीतर नगर निगम प्रशासन और संबंधित ठेकेदार ने उक्त बदतमीज ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से सेवा से कार्यमुक्त नहीं किया, तो संगठन के पदाधिकारी नगर निगम कार्यालय पर तालाबंदी और उग्र धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।

​क्षेत्र की पानी की समस्या का युद्धस्तर पर समाधान किया जाए।

​पत्रकारों के साथ अभद्रता करने वाले इस अराजक तत्व के खिलाफ सख्त दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए।

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