विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: सोन की आवाज न्यूज़ टीपू सुल्तान ब्यूरो चीफ, चन्दौली
रामनगर, जनपद वाराणसी । रामनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र माँ मनसा देवी मंदिर की व्यवस्था और संपत्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। तकरीबन 280 वर्ष पूर्व महाराज काशी नरेश द्वारा निर्मित इस प्राचीन सिद्धपीठ पर बिना किसी विधिक अनुमति और बिना मुख्य पक्षकार की सहमति के, कुछ तत्वों द्वारा चोरी-छिपे एक 'फर्जी' कमेटी बनाकर मंदिर पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कुप्रयास के सामने आने के बाद मंदिर के मुख्य पक्षकार व पुश्तैनी महंत सहित क्षेत्र के तमाम सम्मानित पदाधिकारी, अधिवक्ता, शिक्षक और प्रबुद्ध वर्ग पूरी तरह से विरोध में उतर आए हैं।
मुख्य पक्षकार एवं पुश्तैनी महंत का पक्ष
मंदिर के मुख्य पक्षकार और पुजारी सुधाकर मिश्र (महंत, श्री मनसा देवी मंदिर) ने बताया कि महाराज काशी नरेश की इस भूमि और मंदिर परिसर में पिछले लगभग 200 वर्षों से उनका ब्राह्मण परिवार पूरी निष्ठा और सेवाभाव के साथ माँ की पूजा-अर्चना और देखरेख करता आ रहा है। मंदिर के निर्माणकाल और जीर्णोद्धार से लेकर अब तक महंत महादेव जी के परिवार के लोगों ने अपना पूरा जीवन समर्पित किया है। ऐसे में उन्हें और मूल संरक्षक काशी नरेश को पूरी तरह अज्ञान में रखकर बनाई गई यह कथित कमेटी पूरी तरह अवैध (फेक) है, जिसका एकमात्र उद्देश्य मंदिर को व्यापार का केंद्र बनाना है।
प्रबुद्ध वर्ग और विशिष्ट पदाधिकारियों द्वारा कमेटी का घोर विरोध (क्रमशः):
इस गंभीर मामले को लेकर समाज के सम्मानित और जिम्मेदार नागरिकों ने सामने आकर इस विवादित कमेटी की तीखी आलोचना की है और महंत परिवार के अधिकारों का पुरजोर समर्थन किया है:
१. माननीय ओम प्रकाश सिंह (उत्तर प्रदेश सचिव, राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग): उन्होंने इस कृत्य की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर की मर्यादा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिना मूल संरक्षकों और महंत परिवार की विधिक अनुमति के बनाई गई ऐसी कोई भी कमेटी पूरी तरह अवैध और फर्जी है।
२. राजन कुमार मिश्र (संयोजक - विश्व सनातन संस्थानम, उत्तर प्रदेश): उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी स्थापित परंपरा और पुश्तैनी अधिकारों को इस तरह ताक पर रखना पूरी तरह गैर-कानूनी है। विश्व सनातन संस्थानम ऐसी किसी भी तानाशाही और अवैध कब्जे की कोशिश का कड़ा विरोध करता है।
३. हर्ष सिंह उर्फ गोलू (अधिवक्ता एवं अध्यापक - राष्ट्रभाषा संस्थान, रामनगर): उन्होंने मामले के कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर बात करते हुए कहा कि बिना पक्षकारों से बातचीत किए चोरी-छिपे ऐसी कमेटी का गठन करना सीधे तौर पर समाज को गुमराह करने और व्यवस्था पर डाका डालने का प्रयास है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
४. अरविंद मिश्रा (संपादक एवं अधिवक्ता): उन्होंने कहा कि कानून और समाज कभी भी इस तरह के गुप्त और जबरन हस्तक्षेप की इजाजत नहीं देता। यह कथित कमेटी पूरी तरह से दो नंबर (फेक) है और इसके खिलाफ विधिक कदम उठाए जाने चाहिए।
५. विनोद सिंह (पूर्व सभासद): पूर्व जनप्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक के नाते उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता और समस्त भक्तगण इस पुश्तैनी महंत परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। मंदिर की गरिमा को ठेस पहुँचाने की इस साजिश को जनसमर्थन के बल पर नाकाम किया जाएगा।
६. नवीन कुमार यादव (जिला पत्रकार एवं जिला उपाध्यक्ष, चन्दौली — R.P.S.A.): उन्होंने पत्रकारिता जगत और संगठन की तरफ से पुरजोर आवाज उठाते हुए कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों पर इस प्रकार का कब्जा करने का कुचक्र बेहद शर्मनाक है। संगठन ऐसे तत्वों के खिलाफ और मंदिर की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
हजारों श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और राष्ट्र के सजग पत्रकारों का साफ तौर पर मानना है कि माँ मनसा देवी मंदिर कोई व्यापारिक संस्था नहीं है। इस तरह के जबरन हस्तक्षेप से क्षेत्र की शांति-व्यवस्था भंग हो सकती है। इस संवेदनशील मामले में वाराणसी प्रशासन और स्थानीय पुलिस को तत्काल संज्ञान लेकर इस कथित फर्जी कमेटी की जांच करनी चाहिए और सदियों पुरानी धार्मिक धरोहर व पुश्तैनी महंत परिवार के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।





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