Top News

रिंहद में जहर घोल रहा राखड़ और केमिकल युक्त पानी !

 

सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर सोनभद्र कमलेश कुमार सिंह 

एनजीटी याचिकार्ताओं के दौरे में खुली प्रदूषण की पोल, टीम बोली — “जमीनी हकीकत रिपोर्ट से बिल्कुल अलग”


सोनभद्र।
ऊर्जांचल में बढ़ते प्रदूषण और उससे हो रहे गंभीर दुष्प्रभावों को लेकर रविवार को सिंगरौली प्रदूषण मुक्ति वाहिनी से जुड़े एनजीटी के याचिकार्ताओं ने म्योरपुर ब्लॉक के विभिन्न प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। डोंगिया नाला, बेलवादह, अनपरा, बीना, शक्तिनगर और बलिया नाला समेत कई स्थानों का दौरा कर टीम ने प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान रिंहद जलाशय में गिर रहे राखड़, कोयला धुलाई और केमिकल युक्त गंदे पानी को देखकर टीम के सदस्य हैरान रह गए।

वाहिनी के संयोजक रामेश्वर प्रसाद, क्षेत्रीय संयोजक, ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल सहित बेचन, कुसुम, सुनीता, विश्वनाथ, रमेश और अशोक ने आरोप लगाया कि डोंगिया नाला के माध्यम से भारी मात्रा में केमिकल और दुर्गंधयुक्त पानी सीधे रिंहद जलाशय में छोड़ा जा रहा है। वहीं हजारों लीटर प्रति मिनट राखड़ युक्त पानी भी जलाशय में बहाया जा रहा है। टीम ने कहा कि बलिया नाला की स्थिति तो और भयावह है, जहां का पानी हाथ लगाने लायक भी नहीं बचा है।

“सड़क पर उड़ती धूल और जहरीली हवा से गांव बीमार”

चिल्काडाड़ समेत कई गांवों में बीमारी का खतरा बढ़ा, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

निरीक्षण के दौरान टीम ने सड़क पर उड़ रही धूल और आसपास के गांवों में बढ़ रही बीमारियों पर भी गंभीर चिंता जताई। चिल्काडाड़ ग्राम पंचायत सहित आसपास की आबादी प्रदूषण जनित बीमारियों से जूझ रही है। संयोजक रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि अप्रैल के प्रथम सप्ताह में जिला प्रशासन ने एनजीटी में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर 51 पृष्ठों की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, लेकिन जमीनी हकीकत उस रिपोर्ट से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण रिंहद जलाशय में खुलेआम राखड़ और कोयला धुलाई का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनपरा क्षेत्र में अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है।

वाहिनी ने मांग की कि जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम तत्काल प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करे तथा रिंहद जलाशय में छोड़े जा रहे राखड़ और केमिकल युक्त पानी पर तत्काल रोक लगाए। टीम ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ऊर्जांचल में बढ़ रही बीमारियां आने वाले समय में और भयावह रूप ले सकती हैं। उन्होंने भोपाल एम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदूषण और बीमारियों के बीच संबंध पहले ही उजागर हो चुका है, लेकिन जिम्मेदार विभागों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा।





Post a Comment

Previous Post Next Post
 Son Ki Awaz News
 Son Ki Awaz News

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume