*“कर्मयोगी विचार क्रांति अभियान ने केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर खोला मोर्चा”*
*देश में बढ़ती बेरोजगारी,* किसानों की समस्याओं और आर्थिक असमानता को लेकर अब सामाजिक संगठनों और युवा वर्ग की आवाज़ तेज होती जा रही है। “कर्मयोगी विचार क्रांति” अभियान के तहत एक युवक द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण, नई कृषि क्रांति, रोजगार नीति और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
अभियान के दौरान जारी संदेशों में कहा गया कि देश में आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिए, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ मिल सके। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि वर्तमान व्यवस्था में किसान, मजदूर और आम युवा लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं जबकि जल, जंगल और जमीन बड़े पूंजीपतियों के हाथों में जाने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
*“नई कृषि क्रांति”* का नारा देते हुए अभियान से जुड़े लोगों ने कहा कि देश की कृषि व्यवस्था को आधुनिक तकनीक, उचित समर्थन मूल्य और रोजगार आधारित मॉडल से जोड़ना होगा, तभी गांव और किसान मजबूत होंगे। पोस्टर और संदेशों के माध्यम से यह भी कहा गया कि आजादी के कई दशक बाद भी गरीबी और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, जो सरकारों की आर्थिक और रोजगार नीतियों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
संतोष ठाकुर युवा क्रांतिकारी के अभियान में युवाओं को जागरूक करते हुए “युवा सशक्त, राष्ट्र सशक्त” का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि देश का युवा शिक्षित, रोजगारयुक्त और आत्मनिर्भर होगा तभी भारत मजबूत बन सकेगा।
साथ ही केंद्र सरकार की कृषि नीति, रोजगार नीति, ऊर्जा नीति और परिवहन नीति को लेकर भी सवाल उठाए गए। अभियान से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार जमीनी समस्याओं से दूर होकर केवल प्रचार आधारित राजनीति पर अधिक ध्यान दे रही है, जबकि आम जनता रोजगार, महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रही है।
*“कर्मयोगी विचार क्रांति”* अभियान के समर्थकों ने देशभर के युवाओं, किसानों और मजदूरों से एकजुट होकर विचार क्रांति लाने की अपील की है, ताकि गरीबी और बेरोजगारी के खिलाफ मजबूत जनआंदोलन खड़ा किया जा सके।



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