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ओबरा परियोजना में संविदा श्रमिकों का शोषण चरम पर, अब आर-पार की लड़ाई के मूड में मजदूर

 

सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर सोनभद्र कमलेश कुमार सिंह 

मजदूरी वृद्धि, एरियर, ग्रेच्युटी, बोनस और सुरक्षा की मांग को लेकर मंत्री को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी


ओबरा (सोनभद्र)।
ओबरा की बीटीपीएस (BTPS) और सीटीपीएस (CTPS) परियोजनाओं में कार्यरत संविदा श्रमिकों का लंबे समय से हो रहा शोषण अब खुलकर सामने आ गया है। भारतीय संविदा श्रमिक संगठन, माननीय राज्य मंत्री के आवास पर सैकड़ों श्रमिकों ने एकजुट होकर प्रदेश के माननीय समाज कल्याण मंत्री श्री संजीव सिंह गौड़ को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी पीड़ा और आक्रोश व्यक्त किया। श्रमिकों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे बड़ा आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होंगे।

संगठन के अध्यक्ष मणि शंकर पाठक ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में श्रमिकों की मजदूरी में समय-समय पर वृद्धि की जा चुकी है, लेकिन ओबरा परियोजना में कार्यरत संविदा श्रमिक आज भी पुराने और बेहद कम दरों पर काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां के संविदाकार श्रमिकों के श्रम का खुला शोषण कर रहे हैं और प्रशासन इस पर मौन साधे बैठा है।

उन्होंने आगे कहा कि कई श्रमिक वर्षों से बीटीपीएस में लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक कुशल श्रमिक का दर्जा नहीं दिया गया, जिससे वे उचित वेतन और सुविधाओं से वंचित हैं। यह श्रमिकों के साथ सीधा अन्याय है, जिसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मंत्री उमेश पटेल ने भी श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ओबरा परियोजना में संविदाकारों की मनमानी और श्रमिकों का शोषण अत्यंत चिंताजनक है। 

उन्होंने कहा कि जिन श्रमिकों को वर्षों से कम भुगतान किया गया है, उन्हें अंतर का पूरा एरियर दिया जाना चाहिए। साथ ही, लंबे समय से कार्यरत श्रमिकों को ग्रेच्युटी और बोनस जैसी वैधानिक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं।


उन्होंने विशेष रूप से महिला श्रमिकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि उनके लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा सभी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages) का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित कराया जाना चाहिए, ताकि किसी भी श्रमिक के साथ आर्थिक अन्याय न हो।

ज्ञापन के दौरान मौजूद श्रमिकों ने एक स्वर में कहा कि अब वे अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाले नहीं हैं। यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो ओबरा परियोजना में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।

इस दौरान प्रमुख रूप से रामेश्वर गिरी, महेंद्र पांडेय, फुलेंद्र कुमार झा, विशाल पासवान, धनंजय श्रीवास्तव, राजकुमार यादव, सूरज प्रसाद और फुलवंती देवी सहित बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।

श्रमिकों का कहना है कि अब समय आ गया है कि वर्षों से हो रहे शोषण और अन्याय के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सम्मानजनक कार्य और उचित मजदूरी का रास्ता सुनिश्चित किया जा सके।

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