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चंदौली-वाराणसी बॉर्डर पर कानून का मज़ाक: एक ही गाड़ी में 'आर्मी', 'डॉक्टर' और 'वकील' का बोर्ड... कैमरों की नाक के नीचे पुलिस को चुनौती देता 'महा-जुगाड़'!

 विशेष ब्यूरो रिपोर्ट 

सोन की आवाज न्यूज़ ब्यूरो चीफ: शेख टीपू सुल्तान, चन्दौली

स्थान: पड़ाव चौराहा, चन्दौली-वाराणसी मार्ग


चन्दौली।
सड़कों पर वाहनों पर अवैध पद, रसूखदार स्टीकर और वीआईपी कल्चर के खिलाफ सूबे के मुखिया का सख्त आदेश है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नियमों को ठेंगा दिखाने वाले लोग आज भी बेखौफ घूम रहे हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला चन्दौली और वाराणसी की सीमा पर स्थित अति-संवेदनशील पड़ाव चौराहे पर देखने को मिला, जहाँ नियमों की धज्जियां उड़ाती एक सफेद रंग की वैगनआर (WagonR) गाड़ी (नंबर: UP 67 AD 0068) धड़ल्ले से दौड़ रही है। इस गाड़ी के पिछले शीशे पर ऊपर से नीचे तक तीन सबसे प्रतिष्ठित और संवेदनशील पेशों—'ARMY' (सेना), 'DOCTOR' (चिकित्सक), और 'ADVOCATE' (अधिवक्ता) के स्टीकर एक साथ सजे हुए हैं।

कैमरों से लैस चौराहे पर 'अंधेर नगरी', आला अधिकारियों से सीधे सवाल!

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल स्थानीय प्रशासन और यातायात विभाग की मुस्तैदी पर खड़ा होता है। पड़ाव चौराहा कोई आम मोड़ नहीं है, यह चन्दौली और वाराणसी को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है जो चौबीसों घंटे हाई-टेक CCTV कैमरों और आईटीएमएस (ITMS) सिस्टम की निगरानी में रहता है।

यहाँ सीधे जिले के आला अधिकारियों से तीखे सवाल उठते हैं:

कहाँ है तीसरी आँख की निगरानी? जब पड़ाव चौराहे पर लगे हाई-डेफिनिशन कैमरे हर छोटी-बड़ी गाड़ी की हरकतों को रिकॉर्ड कर रहे हैं, तो कैमरों के कंट्रोल रूम में बैठे ज़िम्मेदार अधिकारियों को यह 'त्रिमूर्ति' गाड़ी क्यों नहीं दिखाई दी?

चौराहे पर तैनात पुलिस क्या कर रही है? पड़ाव चौराहे पर पुलिस और यातायात कर्मियों का भारी पहरा रहता है। ऐसे में सिपाही से लेकर दरोगा तक की नाक के नीचे से यह गाड़ी रोज़ गुजर रही है, तो इस पर कार्रवाई करने से हाथ क्यों कांप रहे हैं? क्या पुलिस सिर्फ आम जनता का हेलमेट चेक करने के लिए खड़ी है?

क्या यह सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक नहीं है? सेना (Army) के नाम का इस तरह सरेआम दुरुपयोग होना सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है। कल को कोई भी असामाजिक तत्व ऐसा फर्जी बोर्ड लगाकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता है। फिर इस लापरवाही का ज़िम्मेदार कौन होगा?

चेकिंग और टोल टैक्स से बचने का 'शॉर्टकट'? 

ग्राउंड जीरो से की गई पड़ताल में यह साफ नजर आ रहा है कि यह गाड़ी मालिक द्वारा पुलिस चेकिंग से बचने, टोल टैक्स की चोरी करने, या फिर चौराहों पर तैनात सिपाहियों पर नाजायज 'फर्जी रौब' झाड़ने का एक अवैध हथकंडा है। कानूनन और व्यावहारिक रूप से एक ही व्यक्ति का एक साथ इन तीनों फुल-टाइम पेशों में होना पूरी तरह असंभव है। अगर यह किसी संयुक्त परिवार की गाड़ी भी है, तब भी मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपनी निजी गाड़ी को इस तरह विज्ञापनों का बोर्ड बनाकर भ्रम पैदा करना पूरी तरह गैर-कानूनी है।

क्या कहता है कानून? इन धाराओं में हो सकती है जेल 

मोटर वाहन अधिनियम (MVA धारा 177/177A): अनधिकृत स्टीकर और अवैध मार्किंग के लिए उत्तर प्रदेश में ₹5,000 तक का भारी चालान काटने का प्रावधान है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS 204): (पुरानी IPC 170) यदि कोई व्यक्ति लोक सेवक या सेना का फर्जी रूप धारण कर भ्रम फैलाता है, तो 1 साल की जेल हो सकती है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS 318): (पुरानी IPC 420) पुलिस और जनता को गुमराह कर गलत लाभ उठाने पर 7 साल तक की जेल का प्रावधान है।


अब आर-पार की कार्रवाई की दरकार

यह मामला सिर्फ एक गाड़ी का नहीं, बल्कि हमारी पूरी यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को दी गई चुनौती का है। क्या चंदौली प्रशासन और वाराणसी ट्रैफिक पुलिस केवल कागजों पर डिजिटल चालान काट रही है या सड़कों पर उतरकर ऐसे रसूखदारों पर भी हंटर चलाएगी?

हम पुलिस अधीक्षक चन्दौली (@ChandauliPolice) और यातायात विभाग से यह मांग करते हैं कि पड़ाव चौराहे के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर इस गाड़ी को तुरंत ट्रेस किया जाए, इसका भारी-भरकम चालान काटा जाए या इसे सीज (Seize) किया जाए, ताकि वीआईपी कल्चर का ढोंग करने वाले ऐसे तत्वों को कड़ा सबक मिल सके।




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