देश की आस्था, संस्कृति और करोड़ों लोगों की जीवनरेखा मां गंगा को बचाने के नाम पर शुरू की गई केंद्र सरकार की “नमामि गंगे योजना” आज गंभीर सवालों के घेरे में खड़ी दिखाई दे रही है। गंगा सफाई, तट संरक्षण, बाढ़ सुरक्षा बांध और सुरक्षात्मक ढांचों के नाम पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बदहाल है।
गांवों से लेकर शहरों तक गंगा किनारे गंदगी, प्रदूषण और कटान की स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई क्षेत्रों में बाढ़ रोकने के लिए बनाए गए बांध पहली बारिश और तेज बहाव में ही जवाब दे देते हैं। जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर करोड़ों-अरबों रुपये गए कहां ?
युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि गंगा सफाई के नाम पर जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नमामि गंगे योजना भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का अड्डा बन चुकी है, जहां कागजों में विकास दिखाकर सरकारी खजाने को लूटा गया।
उन्होंने कहा कि “यदि गंगा आज भी प्रदूषित है, गांव आज भी कटान से तबाह हैं और बाढ़ सुरक्षा के दावे खोखले साबित हो रहे हैं, तो यह सीधे-सीधे जनता के पैसे की लूट है। गंगा के नाम पर राजनीति करने वालों को जवाब देना होगा।”
जनता का कहना है कि यदि इतने बड़े बजट के बाद भी गंगा साफ नहीं हुई, बाढ़ से सुरक्षा नहीं मिली और गांवों का कटान नहीं रुका, तो आखिर जिम्मेदार कौन है ?
अब जरूरत है कि नमामि गंगे योजना से जुड़े हर खर्च, हर ठेके और हर निर्माण कार्य की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच हो। गंगा के नाम पर राजनीति और भ्रष्टाचार करने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।
“मां गंगा नहीं, सरकारी खजाना साफ हुआ है !”
जनता पूछ रही — गंगा सफाई हुई या सिर्फ घोटालों की सफाई ?




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