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25 वर्षों से खेती कर रहे आदिवासियों की जमीन पर फर्जी पट्टे का आरोप

 सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद 


डीएफओ कार्यालय पर प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की उठी मांग

ओबरा/सोनभद्र। ग्राम पंचायत जुगैल के बड़का डाड़ क्षेत्र में वन भूमि के कथित फर्जी पट्टे को लेकर आदिवासियों का आक्रोश फूट पड़ा। मंगलवार को 18 आदिवासी परिवारों ने राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के जिला अध्यक्ष हरदेवनारायण तिवारी के नेतृत्व में डीएफओ कार्यालय ओबरा पर प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गाटा संख्या 14132 की भूमि पर वे पिछले 25 से 30 वर्षों से खेती-बाड़ी कर अपने परिवारों का भरण-पोषण करते आ रहे हैं। आरोप है कि वर्ष 2007-08 में तत्कालीन वन अधिकार समिति के सदस्य अमृतलाल बैगा ने अधिकारियों को गुमराह कर उक्त भूमि का पट्टा अपने तथा अपने परिवार के सदस्यों के नाम करा लिया।

आदिवासियों का कहना है कि तत्कालीन वन अधिकार समिति के अध्यक्ष रामसूरत बैगा तथा सचिव परमा सिंह की जानकारी के बिना गुप्त रूप से यह पट्टा कराया गया। इस संबंध में रामसूरत बैगा द्वारा नायब तहसीलदार ओबरा तथा परमा सिंह द्वारा मंडलायुक्त मिर्जापुर को शपथ पत्र देकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है।

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्ष 2023 तक उक्त भूमि पर उनका निर्विवाद कब्जा एवं खेती जारी रही। इसके बाद अमृतलाल बैगा द्वारा भूमि पर कब्जा करने के उद्देश्य से जुताई कराने का प्रयास किया गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। समय रहते हस्तक्षेप होने से संभावित मारपीट की घटना टल गई।


इंटक जिला अध्यक्ष हरदेवनारायण तिवारी ने आरोप लगाया कि अमृतलाल बैगा ने ग्राम पंचायत जुगैल के विभिन्न स्थानों पर भी अपने तथा अपने परिवार के सदस्यों के नाम वन भूमि के कई पट्टे कराए हैं, जिसकी भी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

इस दौरान डीएफओ ओबरा ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि इस मामले में जिलाधिकारी सोनभद्र का पत्र प्राप्त हो चुका है। प्रकरण की निष्पक्ष जांच एसडीएम के नेतृत्व में कराई जाएगी, जिसमें समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी शामिल रहेंगे। जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

प्रदर्शन में सीटू नेता कामरेड लालचंद, इंटक जिला महासचिव शमीम अख्तर खान, रामप्रसाद, चंदर, हरिलाल, गोरखनाथ, गुलाब, किस्मतिया, मलकनिया, शुकवरिया, वेदवंती, दसवंती, लालमती, रामपति, सियाराम, ईश्वर प्रसाद सहित बड़ी संख्या में आदिवासी एवं श्रमिक मौजूद रहे।

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