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गर्भवती महिला को पीटने व न्याय मांगने आए सेना के जवान को बंधक बनाने वाले मामले में घिरे SHO, राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई F.I.R.


सोन की आवाज न्यूज़ ब्यूरो चीफ चंदौली शेख टीपू सुल्तान

चन्दौली में खाकी दागदार: अलीनगर थाना प्रभारी घनश्याम शुक्ला की कार्यशैली से जनता त्रस्त; 


चन्दौली।
जनपद के थाना अलीनगर अंतर्गत ग्राम कठौरी में पुलिसिया उत्पीड़न, रसूखदारों को संरक्षण देने और रक्षक के ही भक्षक बन जाने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। गुजरात में तबेले में मजदूरी करने वाले दो सगे भाइयों की गाढ़ी कमाई और पैतृक संपत्ति हड़पने की नीयत से उनके सौतेले परिवार ने पतियों की अनुपस्थिति में घर में घुसकर महिलाओं पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। इस बर्बरता में 4 महीने की गर्भवती महिला के पेट पर लाठी से वार किया गया और सुहाग का मंगलसूत्र लूट लिया गया। हद तो तब हो गई जब न्याय की गुहार लगाने जम्मू से आए पीड़िता के फौजी भाई को ही थाना प्रभारी घनश्याम शुक्ला ने थाने में बंधक बनाकर जेल भेजने की धमकी दे डाली। 50 घंटे तक पुलिस मामले को दबाए रही, लेकिन मीडिया और राष्ट्रीय संगठन के कड़े हस्तक्षेप के बाद आखिरकार पुलिस को झुकना पड़ा और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन व गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

गाढ़ी कमाई हड़पने के लिए रचा गया खूनी खेल:

प्राप्त विवरण के अनुसार, ग्राम कठौरी निवासी रामआशीष यादव व रामसजीवन यादव कड़े शारीरिक श्रम से अर्जित अपनी पूरी कमाई पिता दयाराम को भेजते थे। आरोप है कि पिता ने दूसरी पत्नी निर्मला और सौतेले भाई रणजीत यादव उर्फ सोनू के दबाव में आकर 18 बिस्वा जमीन चोरी-छिपे उनके नाम बैनामा कर दी। बीते 21 मई की दोपहर जब दोनों भाई गुजरात में थे, आरोपी रणजीत ने घर में अकेली ममता देवी के साथ छेड़खानी व लज्जा भंग करने का प्रयास किया। शोर मचाने पर बीच-बचाव करने आई उनकी जेठानी रीना देवी (जो 4 माह की गर्भवती हैं) पर पूरे सौतेले परिवार ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। यह जानते हुए भी कि रीना गर्भवती है, आरोपी रणजीत ने उनके पेट पर लाठी से सीधा वार किया, जिससे उनके अजन्मे शिशु की जान खतरे में है। इसी बीच सौतेली माँ निर्मला ने पीड़िता के गले से 5 ग्राम सोने का मंगलसूत्र भी लूट लिया।

थाना प्रभारी घनश्याम शुक्ला के आते ही बढ़े अपराध, कार्यशैली से इलाकाई जनता दुखी:

स्थानीय सूत्रों और क्षेत्र की जनता के अनुसार, जब से थाना प्रभारी (SHO) घनश्याम शुक्ला ने अलीनगर थाने की कमान संभाली है, तब से क्षेत्र में आए दिन नए-नए कारनामे और कांड होते रहते हैं। थाना प्रभारी की कार्यशैली पूरी तरह से विवादित और कानून के स्थापित नियमों के विपरीत है। उनके उल्टे-सीधे काम करने के तरीकों और तानाशाही रवैए से अलीनगर की आम जनता अत्यंत दुखी और आक्रोशित है। आरोप है कि थानाध्यक्ष आम जनता और पीड़ितों की सुनवाई करने के बजाय रसूखदारों को तवज्जो देते हैं, जिससे इलाके का कोई भी व्यक्ति उनके कार्यकाल से खुश नहीं है।

न्याय मांगने पर सेना के जवान को बनाया बंधक, दी जेल भेजने की धमकी:



इसी विवादित कार्यशैली का शिकार इस बार देश की सीमा पर तैनात सेना का एक जवान भी हो गया। घटना के बाद जब पीड़िता ममता देवी का सगा भाई, जो भारतीय सेना (आर्मी) में कार्यरत है और जम्मू में तैनात है, अपनी बहनों की रक्षा के लिए चन्दौली पहुंचा और अलीनगर पुलिस से कार्रवाई की मांग की, तो थाना प्रभारी घनश्याम शुक्ला रसूखदारों के दबाव में आ गए। पुलिस ने 36 घंटे से अधिक समय तक F.I.R. दर्ज नहीं की और जब सेना के जवान ने कानून के दायरे में पुलिसिया सुस्ती पर सवाल उठाया, तो भड़के थाना प्रभारी घनश्याम शुक्ला ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए देश के रक्षक को ही थाने में नजरबंद (अवैध कस्टडी) कर लिया। मौके पर भारी पुलिस बल बुलाकर पूरे पीड़ित परिवार को फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की खुली धमकियां दी जाने लगीं।

चौथे स्तंभ का हस्तक्षेप और पुलिस का सरेंडर:

जब इस पुलिसिया दमन और अन्याय की जानकारी राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष चन्दौली ब्यूरो चीफ शेख टीपू सुल्तान और उनके सहयोगी जिला पत्रकार व राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के सहायक जिला उपाध्यक्ष नवीन कुमार यादव को हुई, तो दोनों ने तत्काल ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। सजग पत्रकारों और संगठन के पदाधिकारियों द्वारा पुलिसिया लापरवाही को बेनकाब करने और उच्चाधिकारियों तक सीधे मामले को उठाने के कड़े हस्तक्षेप के बाद अलीनगर पुलिस पूरी तरह बैकफुट पर आ गई। जो पुलिस 50 घंटे से तहरीर दबाकर बैठी थी, उसने तुरंत घुटने टेकते हुए मुख्य आरोपी रणजीत यादव, पिता दयाराम व सौतेली माँ निर्मला सहित अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 91 (गर्भस्थ शिशु की हत्या का प्रयास), 74 (महिला की लज्जा भंग करना), 117 (घातक हथियारों से गंभीर चोट), 329(3) (गृह-अतिचार), 309(4) (स्त्रीधन की लूट), 61(2) (आपराधिक साजिश) व 351(2) (जान से मारने की धमकी) जैसी अत्यंत संगीन व गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया।

​थाना प्रभारी के खिलाफ जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसपी से गुहार:

पत्रकारों के अथक प्रयास से मुकदमा तो दर्ज हो गया है, लेकिन मुख्य आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं और पीड़ितों को लगातार केस उठाने की धमकी दे रहे हैं। पीड़ित परिवार के साथ-साथ शेख टीपू सुल्तान (वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग) और नवीन कुमार यादव (सहायक जिला उपाध्यक्ष) ने अब इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक (SP) चन्दौली, मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) को भेजकर विवादित थाना प्रभारी घनश्याम शुक्ला के अमानवीय कृत्य व उनके कार्यकाल में हो रहे कारनामों की उच्च स्तरीय जांच करने, पीड़ितों का तत्काल कड़ा मेडिकल (MLC) कराने और फरार आरोपियों की 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की आपातकालीन गुहार लगाई है।

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