पूर्वांचल और सोनांचल राज्य गठन की मांग हुई तेज,
कर्मयोगी विचार क्रांति अभियान ने उठाई आवाज
देश में महिला आरक्षण और डीलिमिटेशन जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार की सक्रियता के बीच अब पूर्वांचल और सोनांचल राज्य गठन की मांग भी तेज होने लगी है। कर्मयोगी विचार क्रांति अभियान से जुड़े युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आजादी के 78 वर्षों बाद भी देश में गरीबी और बेरोजगारी जैसी मूल समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि अलग राज्य बनने से क्षेत्रीय विकास को गति मिलती है और उद्योगों को बढ़ावा मिलता है। उनका दावा है कि नए राज्यों में आने वाली कंपनियों को लंबे समय तक टैक्स में राहत मिलने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। इसलिए सरकार को पूर्वांचल और सोनांचल राज्य के गठन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
संतोष ठाकुर ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के पास स्पष्ट युवा नीति, रोजगार नीति, स्वास्थ्य नीति और शिक्षा नीति का अभाव दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल केवल सत्ता और सरकार बनाने की रणनीति में लगे हुए हैं, जबकि समाजहित और युवाओं के भविष्य को लेकर ठोस पहल नहीं हो रही है।
कर्मयोगी विचार क्रांति अभियान के माध्यम से युवाओं को जागरूक करने का संदेश देते हुए उन्होंने “खेलो, कूदो, पढ़ो, लिखो — युवा क्रांति” का नारा बुलंद किया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को सकारात्मक सोच, शिक्षा और सामाजिक चेतना के साथ आगे बढ़ना होगा तभी वास्तविक परिवर्तन संभव है।
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पूर्वांचल और सोनांचल राज्य गठन की मांग को लेकर जनजागरण तेज करने का भी ऐलान किया है।



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