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जल, जंगल, जमीन और जीवन पर गहराता संकट

 


“पूर्वांचल राज्य और सोनांचल गठन के बिना गांव, जंगल और आदिवासी क्षेत्रों का विकास संभव नहीं”


कर्म योगी विचार क्रांति के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जंगल, पहाड़ और दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी एवं अति पिछड़ा समाज की बदहाल स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। संगठन के युवा क्रांतिकारी नेता संतोष ठाकुर ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी देश के लाखों गरीब, आदिवासी और वंचित परिवार विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। आज भी लोग रोटी, कपड़ा, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत गांवों का देश है, लेकिन सबसे ज्यादा उपेक्षा गांव, जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों की हो रही है। विकास के बड़े-बड़े दावे केवल भाषणों तक सीमित हैं, जबकि धरातल पर आज भी लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई इलाकों में सड़क, अस्पताल और शिक्षा जैसी सुविधाएं नाम मात्र की हैं।

युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर ने कहा कि जब तक पूर्वांचल राज्य और सोनांचल क्षेत्र का अलग गठन नहीं होगा, तब तक यहां के गांवों, जंगलों और आदिवासी इलाकों का समुचित विकास संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से इस क्षेत्र के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों का दोहन तो हुआ, लेकिन यहां के मूल निवासियों को उनका अधिकार और सम्मान नहीं मिला।

उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि केवल घोषणाओं से देश मजबूत नहीं बनेगा। जब तक गांव, मजदूर, किसान, आदिवासी और अति पिछड़ा समाज को सम्मानजनक जीवन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने का सपना अधूरा रहेगा।

कर्म योगी विचार क्रांति के कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार गांवों और जंगलों में रहने वाले लोगों के लिए ठोस और ईमानदार नीति बनाकर विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाए।




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