सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर सोनभद्र कमलेश कुमार सिंह
धूल में दबा विकास : ओबरा नगर पंचायत की बदहाल सड़कों ने खोली दावों की पोल
ओबरा (सोनभद्र)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की मंशा के अनुरूप प्रदेश के ग्राम प्रधान क्षेत्रों को नगर पंचायत में शामिल कर विकास की नई धारा बहाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी नगर पंचायत ओबरा को भी आधुनिक सुविधाओं और स्वच्छ वातावरण का मॉडल बनाने की बात कही जाती रही है, लेकिन धरातल पर हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। विकास के दावों पर इन दिनों धूल और प्रदूषण की मोटी परत जम चुकी है।
नगर पंचायत ओबरा के अंतर्गत शारदा मंदिर से बिल्ली बैरियर तक की मुख्य सड़क इन दिनों आम जनता के लिए भारी परेशानी का कारण बनी हुई है। सड़क पर वर्षों से जमी धूल और मिट्टी की मोटी परत हर गुजरते वाहन के साथ गुबार बनकर उड़ती है, जिससे राहगीरों का चलना दूभर हो गया है। हालत यह है कि तेज धूप और भीषण गर्मी के बीच उड़ती धूल लोगों का दम घोंट रही है और वाहन चालकों को रास्ता तक साफ दिखाई नहीं दे रहा, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन सफाई व्यवस्था के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभा रहा है। कभी-कभार झाड़ू लगाकर केवल ऊपरी गंदगी हटाई जाती है, जबकि सड़क के किनारों और बीच में जमी वर्षों पुरानी मिट्टी जस की तस बनी हुई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव लगभग बंद है, जिससे प्रदूषण दिन-ब-दिन भयावह रूप लेता जा रहा है।
एक ओर प्रदेश सरकार स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त शहरों का सपना दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर ओबरा नगर पंचायत की यह बदहाल तस्वीर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क की समुचित सफाई और पानी के नियमित छिड़काव की व्यवस्था नहीं की गई, तो क्षेत्र में सांस और एलर्जी जैसी बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं।
*अब क्षेत्रीय जनता प्रशासन से सीधे सवाल पूछ रही है —*
“क्या नगर पंचायत ओबरा में विकास सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा, या फिर सड़कों पर जमी धूल की इन परतों को हटाकर जनता को राहत भी दी जाएगी?”




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