सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर सोनभद्र कमलेश कुमार सिंह
करुणा, संघर्ष और जनसेवा की मिसाल: इंसानों से लेकर बेजुबानों तक के हक की लड़ाई में डटे हैं डब्लू सिंह
रेणुकूट, सोनभद्र। औद्योगिक नगरी रेणुकूट इन दिनों एक ऐसे नाम की गूंज से सराबोर है, जिसने मजदूरों, गरीबों और वंचितों के दिलों में नई उम्मीद जगा दी है। वह नाम है — विजय प्रताप सिंह उर्फ डब्लू सिंह, जिन्हें क्षेत्र की जनता आज “मजदूरों का शहंशाह” कहकर पुकार रही है।
दैनिक कुरुक्षेत्र के माध्यम से अपनी निडरता, संघर्षशीलता और जनहित की आवाज बुलंद करने वाले डब्लू सिंह एक बार फिर पूरे जोश और विश्वास के साथ मैदान में उतर चुके हैं।
डब्लू सिंह का मानना है कि किसी भी बड़े बदलाव की नींव जनता के विश्वास पर टिकी होती है।
*हाल ही में जनता के बीच भावुक अंदाज़ में उन्होंने कहा—*
“विश्वास ही रिश्तों की असली ताकत है। आप मेरा साथ दीजिए, मैं आपके हक की लड़ाई में चट्टान बनकर खड़ा रहूँगा।” उनके ये शब्द केवल भाषण नहीं, बल्कि हजारों मजदूरों और पीड़ित परिवारों के लिए एक भरोसे की आवाज बन चुके हैं।
रेणुकूट के गलियारों में डब्लू सिंह की पहचान सिर्फ एक तेजतर्रार जननेता के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और करुणामयी इंसान के रूप में भी है।
वे केवल इंसानों के दुख-दर्द तक सीमित नहीं रहते, बल्कि घायल और बेसहारा बेजुबान जानवरों की सेवा के लिए भी हर वक्त आगे खड़े दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में ऐसा निस्वार्थ सेवा भाव बहुत कम देखने को मिलता है, जहाँ कोई व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ छोड़कर दूसरों की पीड़ा को अपना दर्द बना ले।
संघर्ष डब्लू सिंह की पहचान ही नहीं, बल्कि उनकी विरासत भी है। उनके परिवार ने हमेशा मजदूरों और शोषितों की लड़ाई को अपना धर्म माना। उनके भाइयों ने कड़कड़ाती ठंड, झुलसाती धूप और कठिन परिस्थितियों में सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक आंदोलन, धरना और अनशन कर मजदूरों को उनका हक दिलाने का काम किया।
आज उसी संघर्ष की मशाल को डब्लू सिंह मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।
शासन और प्रशासन के सामने मजदूरों की आवाज को बेखौफ तरीके से उठाना और समाधान होने तक डटे रहना उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।
यही वजह है कि आज रेणुकूट की जनता उन्हें फिर उसी पुराने “शहंशाह” के रूप में देख रही है, जो केवल भाषण नहीं देता बल्कि लोगों के भविष्य की लड़ाई लड़ने का साहस भी रखता है।
*डब्लू सिंह का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—*
“यदि जनता और नेतृत्व के बीच विश्वास मजबूत हो जाए, तो दुनिया की कोई भी ताकत गरीबों का हक नहीं छीन सकती।”
*आज रेणुकूट की फिजाओं में एक ही चर्चा है—*
“जब जनता साथ खड़ी हो जाए, तो संघर्ष करने वाले का हौसला कई गुना बढ़ जाता है।”
और शायद यही विश्वास आने वाले समय में रेणुकूट की दशा और दिशा दोनों बदलने का कारण बनेगा।


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