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नगर पंचायत ओबरा में भ्रष्टाचार का खेल! विकास के नाम पर बर्बादी, जनता बेहाल


सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर सोनभद्र शिव प्रताप सिंह

अतिक्रमण हटाने में लाचार प्रशासन, ऊंची-नीची सड़क बनाकर जलभराव को दे रहा न्योता 


ओबरा, सोनभद्र।
नगर पंचायत ओबरा में विकास कार्यों के नाम पर भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सड़क और नाली निर्माण में मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर नगर पंचायत जनता की सुविधा के लिए काम कर रही है या सिर्फ सरकारी धन की बंदरबांट के लिए?

क्षेत्र में सड़क निर्माण इस तरह कराया जा रहा है कि कहीं सड़क को नीचे बना दिया गया है तो कहीं आगे का हिस्सा ऊंचा कर दिया गया है। इस अव्यवस्थित निर्माण के कारण भविष्य में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा होना तय माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क समतल नहीं होगी और उचित ढलान के साथ नाली नहीं बनेगी, तो बरसात में पूरा इलाका जलमग्न हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि सड़क पर कब्जाधारियों द्वारा किए गए अतिक्रमण को नगर पंचायत क्यों नहीं हटा रही? आखिर किसके दबाव में प्रशासन कार्रवाई से बच रहा है? जबकि पूरा क्षेत्र शक्ति नगर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आता है, जहां सड़क और नाली का निर्माण जनसुविधा तथा जल निकासी के मानकों के अनुरूप होना चाहिए।

आरोप यह भी है कि कहीं मकान मालिकों की बाउंड्री वॉल का सहारा लेकर मिट्टी भराई की जा रही है, तो कहीं बिना नाली के ही सड़क बना दी जा रही है। यह निर्माण कार्य न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि भविष्य में विवाद और नुकसान की जड़ भी बन सकता है।

हैरानी की बात यह है कि जहां आबादी नहीं है और खाली प्लॉट पड़े हैं, वहां भी सड़क और नाली बनाकर सरकारी धन खर्च किया जा रहा है। वहीं जिन स्थानों पर वास्तविक जरूरत है, वहां मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि नगर पंचायत में ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हो सकता है। शिकायतों के बावजूद नगर पंचायत प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। संवाददाता द्वारा अधिकारियों से लिखित और मौखिक संपर्क करने पर भी केवल नियम-कानून की बातें सुनने को मिलीं, लेकिन मानकों के विपरीत हो रहे निर्माण कार्यों पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई।

अब जनता पूछ रही है—क्या नगर पंचायत का उद्देश्य विकास करना है या विवाद पैदा कर लोगों को आपस में लड़ाने का? क्या सरकारी धन सिर्फ कागजों पर विकास दिखाने और कमीशनखोरी का माध्यम बन चुका है? जनता जवाब चाहती है, और प्रशासन को जवाब देना ही होगा।

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