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वनभूमि पर कथित कब्जा, धार्मिक गतिविधियों और अंधविश्वास के खेल के आरोपों से मचा हड़कंप — ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की उठाई मांग

सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद बिंद 


ब्रेकिंग न्यूज । डोमरीया के चरका में वनभूमि को लेकर विवाद गरमाया


वनभूमि की आड़ में निर्माण या धार्मिक गतिविधि? प्रशासन करे मौके का सीमांकन, जांच में सामने आए पूरी सच्चाई


सोनभद्र।
ग्राम पंचायत डोमरीया के मौजा चरका में वनभूमि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने वन विभाग की भूमि पर कथित कब्जे, निर्माण सामग्री जुटाने तथा धार्मिक गतिविधियों के संचालन को लेकर गंभीर शिकायतें प्रशासन के समक्ष रखी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि महेंद्र नाथ चेरो द्वारा धरती माता के स्थान के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र कर कथित रूप से भूत-प्रेत भगाने की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं और इसी आड़ में वनभूमि के एक बड़े हिस्से पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है।


ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मौके पर कथित रूप से मकबरानुमा निर्माण कराए जाने तथा इस्लामिया झंडा लगाए जाने की घटना सामने आई। इसके अलावा कुछ ग्रामीणों ने गौ-तस्करी से जुड़े लोगों को संरक्षण दिए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी सत्यता जांच का विषय है।

वनभूमि पर गतिविधियों को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल


ग्रामीणों के मुताबिक शिकायत के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और वहां लगाए गए झंडे को हटाया गया तथा भविष्य में ऐसी गतिविधियां नहीं करने की चेतावनी दी गई। यदि यह कार्रवाई विभागीय स्तर पर हुई है तो मौके की भूमि की स्थिति, निर्माण की प्रकृति और संबंधित अभिलेखों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है।


ग्रामीणों का कहना है कि वनभूमि किसी व्यक्ति अथवा संस्था की निजी संपत्ति नहीं है। ऐसे में यदि वनभूमि पर बिना अनुमति किसी प्रकार का निर्माण, सामग्री का भंडारण अथवा अन्य गतिविधि की जा रही है तो राजस्व एवं वन अभिलेखों के आधार पर तत्काल सीमांकन कराया जाना चाहिए।

‘भूत भगाने’ के नाम पर क्या हो रहा है खेल?



ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महेंद्र नाथ चेरो अपने पुत्र तथा कुछ अनुयायियों के साथ धरती माता के स्थान पर कथित रूप से भूत-प्रेत भगाने का कार्य करते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इस गतिविधि के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया जा रहा है तथा वन क्षेत्र में धीरे-धीरे निर्माण सामग्री पहुंचाई जा रही है।

यदि ग्रामीणों के ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वनभूमि के संरक्षण, सार्वजनिक व्यवस्था और लोगों को कथित रूप से गुमराह किए जाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच भी आवश्यक होगी।


प्रशासन से ग्रामीणों की सीधी मांग

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, प्रभागीय वनाधिकारी और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि—

- मौके की राजस्व एवं वन अभिलेखों के आधार पर पैमाइश/सीमांकन कराया जाए।

- वनभूमि पर हुए कथित निर्माण एवं निर्माण सामग्री की जांच की जाए।

. धार्मिक गतिविधियों के नाम पर किए   जा रहे कार्यों की वास्तविकता की जांच हो।

. लगाए गए झंडे और उसे हटाने की कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।

- कथित अतिक्रमण की वीडियोग्राफी कराकर मौके की रिपोर्ट तैयार की जाए।

- गौ-तस्करी से संरक्षण के आरोपों की भी पुलिस स्तर से स्वतंत्र जांच कराई जाए।

- यदि वनभूमि पर अवैध कब्जा या निर्माण प्रमाणित होता है तो नियमानुसार कार्रवाई कर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया जाए।

- अब बड़ा सवाल—चरका की वनभूमि पर आखिर चल क्या रहा है?

- मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वनभूमि पर वास्तव में अवैध कब्जे या निर्माण की कोशिश हो रही है, या ग्रामीणों की शिकायतों के पीछे कोई दूसरा विवाद है?

- इसका जवाब केवल निष्पक्ष मौके की जांच, राजस्व-वन अभिलेखों के मिलान और संबंधित पक्षों के बयान से ही सामने आ सकता है।

. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को हल्के में न लिया जाए और मौके की निष्पक्ष जांच कर पूरी सच्चाई सार्वजनिक की जाए।



स्पष्टता: धार्मिक गतिविधियों, कथित निर्माण और गौ-तस्करी से संरक्षण संबंधी आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। संबंधित व्यक्ति/पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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