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दुर दुर से 36 शाल बाद पहुंचे पुरातन के अधिकारी कर्मचारी नेता बनकर लौटे छात्र ने एक दूसरे से अपनी बात साझा कर हुए भाव विभोर।

सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर राम पुकार प्रसाद 

 अवधूत भगवान राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय के  पुरातन छात्र छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम से बिखेड़ा जलवा 



अनपरा, सोनभद्र। 
स्थानीय अवधूत भगवान राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को अवसर था पहली वार पुरातन छात्रों का भव्य समागम  का ।इस अवसर पर वर्ष 1991 से लेकर 2024 तक के विभिन्न सत्रों के पुरातन छात्र अपने बैचमेट्स के साथ महाविद्यालय पहुंचे और पुरानी यादों को साझा करते हुए भावुक एवं आनंदमय क्षणों का अनुभव किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंडालको पावर डिवीजन, रेनूसागर के अध्यक्ष आर. पी. सिंह रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रोफेसर शिखा श्रीवास्तव, अध्यक्ष, रक्षा एवं स्ट्रैटेजिक अध्ययन विभाग, टी.डी.पी.जी. कॉलेज, जौनपुर तथा प्रोफेसर सुधांशु सिंह, अधिष्ठाता, शिक्षा संकाय, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर उपस्थित रहे। मंचासीन अतिथियों में प्रोफेसर शक्ति सिंह, शकतेषगढ़ कॉलेज, डॉ. विजय प्रताप सिंह, पूर्व प्राचार्य, अवधूत भगवान राम पीजी कॉलेज तथा डॉ. अजय कुमार सिंह, वरिष्ठ प्रवक्ता, अवधूत भगवान राम पीजी कॉलेज शामिल रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा अवधूत भगवान राम, अवधूत सिंह शावक राम, अवधूत तुकाराम एवं अघोराचार्य सिद्धार्थ गौतम राम के तैलचित्रों पर दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ।

मुख्य अतिथि आर. पी. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पुरातन विद्यार्थी आपस में एक समूह बनाकर एक-दूसरे का सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने महाविद्यालय के विकास में हर संभव सहयोग करने का आश्वासन भी दिया।

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर शिखा श्रीवास्तव ने कहा कि इस शानदार पुरातन छात्र समागम के आयोजन के लिए महाविद्यालय बधाई का पात्र है। उन्होंने आयोजन के लिए प्राचार्य, कार्यक्रम संयोजक तथा पूरी आयोजन टीम की सराहना की।

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर सुधांशु सिंह ने कहा कि इस पुरातन छात्र समागम को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि बीता हुआ समय लौटकर फिर सामने आ गया है। उन्होंने महाविद्यालय की संरचना और पुरातन विद्यार्थियों के जुड़ाव को उदाहरण के माध्यम से समझाया। अन्य अतिथियों, प्रोफेसर शक्ति सिंह एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. विजय प्रताप सिंह ने भी पुरातन विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

स्वागत भाषण में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय विक्रम सिंह ने सभी अतिथियों एवं पुरातन विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पुरातन विद्यार्थी इस समागम में खुलकर आनंद लें और अपने महाविद्यालय से अपने जुड़ाव को और मजबूत करें।

इसके पश्चात “एक शाम एल्यूमिनी के नाम” कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें विभिन्न सत्रों के पुरातन विद्यार्थियों ने अपने अनुभव और महाविद्यालय से जुड़ी पुरानी स्मृतियां साझा कीं। किसी ने महाविद्यालय के प्रथम प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह को याद किया तो किसी ने डॉ. ओझा, डॉ. अजय कुमार सिंह और डॉ. विजय प्रताप सिंह से जुड़ी अपनी यादों को साझा किया। इन संस्मरणों ने वातावरण को भावुक कर दिया।

कार्यक्रम में गीत-संगीत ने समां बांध दिया। “तेरे जैसा यार कहां, कहां ऐसा याराना”, “आने वाला पल जाने वाला है”, “सोचेंगे तुम्हें प्यार करें कि नहीं” तथा “पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा” जैसे गीतों ने पुरातन छात्रों को अपनी छात्र जीवन की यादों में वापस पहुंचा दिया। बी.एड. की छात्रा निमिषा शर्मा ने अपनी प्रस्तुति से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। दोपहर 2 बजे से प्रारंभ हुआ कार्यक्रम रात लगभग 12 बजे तक चला।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं अन्य सम्मानित अतिथियों को महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा डायरी, अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। गीत-संगीत से कार्यक्रम में विशेष रंग भरने वाले  राहुल पाठक, सविता पाठक एवं उनकी टीम को भी सम्मानित किया गया।

महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापकों डॉ. चंद्रशेखर तिवारी, डॉ. प्रीति मौर्या, डॉ. रेखा मिश्रा, राजकुमार विश्वकर्मा एवं डॉ. नीलकंठ मिश्रा का भी सम्मान किया गया।कार्यक्रम के संयोजक  अनूप कुमार द्विवेदी ने सफल आयोजन के लिए सभी अतिथियों, पुरातन विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। सांस्कृतिक आयोजन को सफल बनाने में नीलिमा जोशी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

महाविद्यालय के मास कम्युनिकेशन विभाग के विद्यार्थियों ने “एबीआर न्यूज़” के बैनर तले पुरातन विद्यार्थियों के साक्षात्कार भी लिए। इस दौरान विद्यार्थियों ने पुरातन छात्रों से उनके छात्र जीवन, महाविद्यालय से जुड़ी स्मृतियों तथा वर्तमान जीवन के अनुभवों पर बातचीत की।

कार्यक्रम का सफल संचालन  तनुश्री एवं किरण लता ने किया। आयोजन में डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव एवं डॉ. अभय शंकर द्विवेदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इसके अतिरिक्त डॉ. जयशंकर पांडे, डॉ. राजेश कुमार सिंह परिहार, डॉ. अनिल कुमार पांडेय, डॉ. सुभाष चौहान, डॉ. कुष्मांडा, डॉ. सत्यनारायण, दिनेश प्रकाश सिंह, अजय कुमार सिंह (अकाउंटेंट), डॉ. राजेश यादव सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति एवं सहयोग सराहनीय रहा।

पुरातन छात्र समागम ने महाविद्यालय और उसके पूर्व विद्यार्थियों के बीच पुराने संबंधों को एक बार फिर जीवंत कर दिया। आयोजन ने न केवल पुरानी स्मृतियों को ताजा किया, बल्कि वर्तमान और पुरातन विद्यार्थियों के बीच संवाद एवं सहयोग की नई संभावनाओं को भी मजबूत किया।



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