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आकांक्षी ब्लॉक रामगढ़ में विकास के दावों की खुली पोल!

 सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद बिंद 


स्कूलों के आसपास गंदगी का अंबार, रास्तों पर अतिक्रमण और सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल—VIP दौरे में 20 मिनट की सफाई के बाद ‘जनता’ बन जाते हैं सफाईकर्मी!



रामगढ़/सोनभद्र।
जनपद सोनभद्र के चतरा ब्लॉक क्षेत्र स्थित रामगढ़ को आकांक्षी ब्लॉक के रूप में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ब्लॉक मुख्यालय और विद्यालयों के आसपास गंदगी, कूड़े के ढेर, जलभराव, अतिक्रमण तथा अव्यवस्थित रास्तों की शिकायतें सामने आ रही हैं। सबसे गंभीर आरोप सफाई व्यवस्था को लेकर लगाए जा रहे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच की मांग स्थानीय लोगों ने की है।

रामगढ़ में खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आसपास प्राथमिक विद्यालय, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय इंटर कॉलेज समेत कई शिक्षण संस्थान संचालित हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का आवागमन होता है। इसके बावजूद विद्यालयों के आसपास गंदगी और कूड़े का अंबार तथा रास्तों की बदहाली बच्चों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

 *स्कूलों के आसपास कूड़े का अंबार, खेतों तक पहुंच रहा प्लास्टिक कचरा* 



स्थानीय लोगों का आरोप है कि ब्लॉक परिसर के सामने खलिहान की भूमि के पास कूड़ा एकत्रित किया जा रहा है। यहां प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए मशीन स्थापित होने की बात भी सामने आई है, लेकिन उसके प्रभावी संचालन और कचरे के व्यवस्थित निस्तारण की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

आरोप है कि प्लास्टिक सहित अन्य कचरा हवा और बारिश के पानी के साथ आसपास के खेतों तक पहुंच रहा है। इससे जहां खेती प्रभावित होने की आशंका है, वहीं पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

बरसात के मौसम में कूड़े और जलभराव के कारण मच्छर तथा अन्य कीटाणुओं के पनपने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में विद्यालय जाने वाले बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावकों में चिंता होना स्वाभाविक है।

 *विद्यालय के मुख्य रास्ते पर अतिक्रमण का आरोप* 

उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के आसपास के रास्ते को लेकर भी स्थानीय लोगों ने गंभीर शिकायतें की हैं। आरोप है कि विद्यालय के मुख्य गेट के आसपास अस्थायी दुकानों और गुमटियों के कारण रास्ता संकरा हो गया है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक विद्यालय का मुख्य प्रवेश मार्ग अव्यवस्थित होने के कारण छात्र-छात्राओं को छोटे और गंदगी से भरे रास्ते से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है। कीचड़ और कूड़े के बीच से गुजरने को मजबूर बच्चों की परेशानी पर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

वहीं बाजार क्षेत्र में तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजने से ध्वनि प्रदूषण की शिकायत भी सामने आ रही है। इससे विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित होने का आरोप लगाया गया है।

 *‘VIP आए तो चमक उठता है ब्लॉक’, 20 मिनट की सफाई के बाद बदल जाती है तस्वीर!* 

सफाई व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी मंत्री, जिलाधिकारी अथवा अन्य वरिष्ठ अधिकारी का कार्यक्रम चतरा ब्लॉक के रामगढ़ स्थित ब्लॉक परिसर में प्रस्तावित होता है, तब कथित तौर पर पूरे क्षेत्र के सफाई कर्मियों को एडीओ पंचायत की ओर से सूचना देकर सुबह करीब 7:30 बजे ब्लॉक परिसर में बुलाया जाता है।

आरोप है कि सफाई कर्मियों से आनन-फानन में करीब 20 मिनट में पूरे ब्लॉक परिसर में झाड़ू लगवाकर सफाई कराई जाती है और फोटो खिंचवाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस दौरान अधिकारी एवं सफाई कर्मी सफाई कार्य की तस्वीरें खिंचवाते हैं और इसके बाद सफाई कर्मियों को वापस भेज दिया जाता है।

 *लेकिन आरोप यहीं खत्म नहीं होते।* 

 *सफाई कर्मियों को जनता बनाकर दिखाने का भी आरोप!* 

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक कथित तौर पर सफाई कार्य पूरा होने के बाद कुछ सफाई कर्मियों को कपड़े बदलकर दोबारा ब्लॉक परिसर में बुलाया जाता है और अधिकारियों के कार्यक्रम में आम जनता के बीच बैठाया जाता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इससे वरिष्ठ अधिकारियों के सामने ऐसा माहौल दिखाई देता है मानो क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीण कार्यक्रम में स्वेच्छा से शामिल हुए हों।

यदि स्थानीय लोगों के ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल सफाई व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सरकारी कार्यक्रमों की वास्तविकता और अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की जा रही तस्वीर पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

 *‘गोपनीय तरीके से कार्यक्रम’, ग्रामीणों को सूचना नहीं देने का आरोप* 

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ब्लॉक स्तर पर होने वाले कई कार्यक्रमों की सूचना क्षेत्र की जनता को व्यापक रूप से नहीं दी जाती। आरोप है कि कुछ कार्यक्रम अधिकारियों की सुविधा के अनुसार सीमित स्तर पर आयोजित कराए जाते हैं और बाद में भीड़ दिखाने के लिए कर्मचारियों अथवा अन्य लोगों की मौजूदगी कराई जाती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि ब्लॉक परिसर में आयोजित पिछले कुछ VIP कार्यक्रमों की वीडियो रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

 *CCTV फुटेज खोले तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर!* 

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि एडीओ पंचायत कार्यालय तथा खंड विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि पिछले कई महीनों के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से पहले और बाद की फुटेज देखी जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि सफाई कर्मियों को किस समय ब्लॉक में बुलाया गया, कितने समय तक सफाई कराई गई और उसके बाद उनकी ड्यूटी कहां लगाई गई।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल कागजी उपस्थिति और फोटो के आधार पर सफाई व्यवस्था की समीक्षा करने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जानी चाहिए।

 *सफाई कर्मियों की ड्यूटी पर भी उठ रहे सवाल* 

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ सफाई कर्मियों से नियमित ग्राम पंचायतों में सफाई कार्य कराने के बजाय अन्य कार्य कराए जाते हैं। कुछ ग्रामीणों ने अधिकारियों और सफाई कर्मियों के बीच कथित मिलीभगत तथा आर्थिक लेन-देन के आरोप भी लगाए हैं।

हालांकि कमीशन दिए जाने अथवा किसी अधिकारी को धन देने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

यदि सफाई कर्मियों द्वारा किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन किए जाने का दावा किया जा रहा है तो इसकी जांच संबंधित विभाग के अभिलेखों, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए।

 *गांवों में सफाई कौन करेगा, जब कर्मचारी ब्लॉक में नजर आएंगे?* 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सफाई कर्मियों को नियमित रूप से ग्राम पंचायतों में सफाई कार्य के लिए तैनात किया गया है तो विद्यालयों, पंचायत भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई क्यों नहीं दिखाई दे रही?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सफाई कर्मियों की वास्तविक उपस्थिति की जांच की जाए और उनके पिछले कई महीनों के कार्यों का सत्यापन कराया जाए तो व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

 *शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप* 

स्थानीय पत्रकार जगन्नाथ द्वारा इस समस्या को लेकर जिलाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दिए जाने तथा खंड विकास अधिकारी/एडीओ पंचायत को कई बार जानकारी दिए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं कराया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार अधिकारी की ओर से कथित रूप से यह जवाब दिया गया कि “हमको जो करना होगा करेंगे, आपको जो करना है आप करिए।” यदि जांच में यह कथन सही पाया जाता है तो जनशिकायतों के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

 *जांच हुई तो खुल सकता है सफाई व्यवस्था का पूरा ‘खेल’* 

स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि रामगढ़ क्षेत्र में तैनात सफाई कर्मियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। प्रत्येक ग्राम पंचायत में सफाई कर्मियों की उपस्थिति, ड्यूटी चार्ट, उपस्थिति पंजिका, सफाई कार्य की फोटो/जियो टैगिंग, निरीक्षण रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था की जांच हो।है

इसके साथ ही पिछले कई महीनों के दौरान ब्लॉक परिसर में आयोजित VIP एवं सरकारी कार्यक्रमों की CCTV फुटेज सुरक्षित कराकर जांची जाए।

यह भी जांच का विषय बनाया जाए कि कार्यक्रम के दिन कितने सफाई कर्मियों को बुलाया गया, उन्होंने कितने समय तक सफाई की, किस अधिकारी के निर्देश पर उनकी ड्यूटी बदली गई और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वे कहां गए।

 *डीएम से तत्काल कार्रवाई की मांग* 

स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि विद्यालयों के मुख्य मार्ग से अतिक्रमण हटाया जाए, कूड़े का तत्काल निस्तारण कराया जाए, प्लास्टिक कचरा निस्तारण मशीन को प्रभावी ढंग से संचालित कराया जाए तथा विद्यालयों के आसपास नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।

इसके अलावा विद्यालय क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण और रास्ता बाधित करने वाली दुकानों एवं गुमटियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी की गई है।

 *अब सवाल प्रशासन से आकांक्षी ब्लॉक में यह कैसी व्यवस्था?* 

रामगढ़ को आकांक्षी ब्लॉक के रूप में विकास की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। ऐसे में यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बेहतर होना अपेक्षित है।

लेकिन यदि विद्यालयों के आसपास कूड़े के ढेर, रास्तों पर अतिक्रमण, जलभराव और अनियमित सफाई व्यवस्था की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो यह निश्चित रूप से जांच का विषय है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रामगढ़ ब्लॉक की सफाई व्यवस्था केवल VIP अधिकारियों के दौरे तक सीमित है? क्या 20 मिनट की सफाई और कुछ तस्वीरों से जमीनी हकीकत बदली जा सकती है? और यदि सफाई कर्मियों की वास्तविक ड्यूटी कहीं और है तो गांवों और विद्यालयों की सफाई कौन करेगा?

अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है। यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराकर CCTV फुटेज, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट और सफाई कार्य के अभिलेख सार्वजनिक रूप से जांचता है तो आरोपों की सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के बाद स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

स्थानीय लोगों को अब इंतजार है कि जिला प्रशासन इन गंभीर शिकायतों को महज आरोप मानकर नजरअंदाज करता है या जमीनी जांच कर जिम्मेदार पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करता है।

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