सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद बिंद
वन विभाग ने भेजी टीम, निरीक्षण के दौरान पानी में समाया मगरमच्छ; नहर की बदहाली पर भी उठे गंभीर सवाल
रामगढ़/सोनभद्र। भूसौलिया माइनर से रामगढ़ क्षेत्र की ओर जाने वाली नहर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने नहर के किनारे करीब 5 फीट लंबे मगरमच्छ को बैठे देखा। मगरमच्छ दिखाई देने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीणों में भय और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि मगरमच्छ को जल्द पकड़कर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया तो वह आबादी वाले क्षेत्र या खेतों की ओर पहुंचकर लोगों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
मामले की जानकारी मिलने पर पत्रकार जगन्नाथ मौके पर पहुंचे और स्थिति देखने के बाद तत्काल वन विभाग के वन क्षेत्राधिकारी को सूचना दी। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र का निरीक्षण किया। टीम के पहुंचने के दौरान मगरमच्छ नहर के पानी में चला गया। वन विभाग द्वारा आसपास के क्षेत्र में निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई है।
नहर की बदहाली पर भी ग्रामीणों में आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि भूसौलिया माइनर से रामगढ़ तक हर वर्ष नहर की स्क्रेपिंग और सफाई के नाम पर कार्य कराया जाता है, लेकिन नहर की वास्तविक मरम्मत की स्थिति बेहद खराब है। आरोप है कि कई स्थानों पर नहर जर्जर और क्षतिग्रस्त पड़ी है तथा कार्य के नाम पर केवल घास-फूस की सफाई कर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार नहर में पानी छोड़े जाने के बाद जगह-जगह क्षतिग्रस्त हिस्सों से पानी फैलने के कारण किसानों की लगभग 100 से 150 बीघा धान की फसल प्रभावित अथवा नष्ट होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि नहर की केवल कागजी सफाई और स्क्रेपिंग के बजाय उसकी जमीनी स्तर पर जांच कराकर स्थायी मरम्मत कराई जाए। साथ ही मगरमच्छ को जल्द सुरक्षित तरीके से पकड़कर ग्रामीण आबादी से दूर किया जाए, ताकि किसी अप्रिय घटना से पहले खतरे को टाला जा सके।
अब देखना यह है कि वन विभाग मगरमच्छ को पकड़ने के लिए क्या कार्रवाई करता है और सिंचाई विभाग नहर की बदहाली को दूर करने के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है।


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