सोन की आवाज न्यूज़ जनपद चंदौली ब्यूरो रिपोर्ट शेख टीपू सुल्तान
चंदौली। जिला मुख्यालय पर आयोजित 'विकास समन्वय और निगरानी समिति' (DISHA) की बैठक उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भेदभाव के आरोपों को लेकर भारी हंगामा शुरू हो गया। देखते ही देखते कलेक्ट्रेट परिसर में तनाव का माहौल बन गया।
इस हंगामे के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह दर्जनों पत्रकारों के माइक आगे बढ़ाने के बावजूद बिना बाइट दिए गुस्से में जाते दिख रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है इस वायरल वीडियो के पीछे का पूरा सच और संदर्भ।
विवाद की मुख्य वजह: 'प्रतिनिधियों की एंट्री' पर भेदभाव का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट सभागार में जिले के विकास कार्यों को लेकर 'दिशा' की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी। आरोप है कि बैठक के दौरान:
सपा सांसद के प्रतिनिधि को रोका गया: समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह के आधिकारिक सांसद प्रतिनिधि को सभागार के अंदर जाने से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा रोक दिया गया।
भाजपा विधायकों के प्रतिनिधियों को मिली एंट्री: दूसरी ओर, सपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों के प्रतिनिधियों को आसानी से अंदर जाने की अनुमति दे दी गई।
इसी कथित भेदभाव और दोहरे रवैये को लेकर बैठक के भीतर ही तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने जल्द ही एक बड़े हंगामे और बवाल का रूप ले लिया।
मीडिया की नो-एंट्री से भड़का गुस्सा
प्रशासन के रवैये से नाराज विपक्ष का गुस्सा तब और बढ़ गया जब सिर्फ नेताओं के प्रतिनिधियों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय मीडियाकर्मियों को भी इस महत्वपूर्ण बैठक की कवरेज करने से साफ मना कर दिया गया। मीडिया पर लगाई गई इस पाबंदी ने आग में घी का काम किया।
इसलिए सांसद ने नहीं दी बाइट, सीधे गाड़ी की तरफ बढ़े
बैठक के भीतर हुए इस पूरे घटनाक्रम और मीडिया को कवरेज से रोके जाने के विरोध में सांसद वीरेंद्र सिंह और सपा कार्यकर्ता बेहद आक्रोशित हो गए।
जब बैठक खत्म होने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद दर्जनों पत्रकारों ने एक साथ अपने माइक आगे बढ़ाकर सांसद वीरेंद्र सिंह से इस हंगामे पर उनकी प्रतिक्रिया (बाइट) लेनी चाही, तो उन्होंने ऑन-कैमरा कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया।
यह इनकार मीडिया के प्रति किसी नाराजगी के कारण नहीं, बल्कि प्रशासन द्वारा मीडिया को कवरेज से रोके जाने और बैठक में हुए भेदभाव के विरोध स्वरूप था। सांसद ने प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराते हुए मीडिया से दूरी बनाई और सीधे अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए।
निष्कर्ष: सोशल मीडिया पर पत्रकारों के माइक हटाने और सांसद के बिना बोले चले जाने का जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह असल में चंदौली कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और भेदभाव के खिलाफ विपक्ष का तीखा विरोध प्रदर्शन था।


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