सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर सोनभद्र शिव प्रताप सिंह
पानी निकासी की व्यवस्था बिना सड़क निर्माण, क्या जानबूझकर पैदा किया जा रहा है नया विवाद?
ओबरा/सोनभद्र। नगर पंचायत ओबरा के कार्यों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उर्मिला सिंह के मकान के सामने स्थित 12×102 फीट का रास्ता, जो मुख्य मार्ग से जुड़ता है, भूमिधारी मोहनलाल द्वारा उपलब्ध कराया गया है तथा यह भूमि शक्तिनगर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत निहित बताई जा रही है। इसके बावजूद नगर पंचायत द्वारा केवल 68×12 फीट हिस्से में ही सड़क निर्माण कराया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर पंचायत ओबरा की ऐसी क्या मजबूरी है कि पूरा रास्ता छोड़कर केवल आंशिक हिस्से में ही सड़क बनाई जा रही है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्य पारदर्शिता और जनहित दोनों के विपरीत दिखाई देता है।
मामले में और भी बड़ा विरोधाभास तब सामने आया जब नगर पंचायत ने नाली निर्माण कार्य को “विवादित” बताकर रोक दिया, जबकि उसी स्थान पर सड़क निर्माण कार्य लगातार जारी है।
*अब सवाल उठता है—यदि नाली विवादित है, तो सड़क निर्माण कैसे वैध हो गया? क्या नियम केवल चुनिंदा कार्यों पर ही लागू किए जा रहे हैं?*
उर्मिला सिंह के मकान के सामने नाली निर्माण रुक जाने से गंदे पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है। यदि पहले सड़क बना दी गई और नाली नहीं बनी, तो मकान का गंदा पानी मजबूरन सड़क पर बहाना पड़ेगा। इससे न केवल सड़क क्षतिग्रस्त होगी बल्कि भविष्य में पड़ोसियों के बीच विवाद, गंदगी और जलभराव जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न होंगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत का यह रवैया न्यायसंगत नहीं बल्कि पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। बिना नाली के सड़क निर्माण करना तकनीकी और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से गलत है। इससे साफ प्रतीत होता है कि संबंधित विभाग मूल समस्या का समाधान करने के बजाय नई समस्या खड़ी कर रहा है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस विवादित निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए। पहले पानी निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए नाली का निर्माण कराया जाए, उसके बाद ही पक्की सड़क बनाई जाए। अन्यथा सड़क निर्माण पर भी रोक लगाई जाए जब तक जल निकासी का स्थायी समाधान न हो जाए।
*अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं*
*—क्या जनता की इस जायज मांग को सुना जाएगा,*
*या फिर नगर पंचायत की मनमानी यूँ ही जारी रहेगी?*


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