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चतरा जनकल्याण मेले में अव्यवस्था पर फूटा पत्रकारों का गुस्सा “चौथे स्तंभ का अपमान बर्दाश्त नहीं” — बैठने की व्यवस्था न होने पर नाराजगी

 


सोनभद्र/चतरा।
विकास खंड चतरा परिसर में आयोजित तीन दिवसीय भव्य जनकल्याण एवं स्वास्थ्य मेले का शुभारंभ जनपद प्रभारी मंत्री हंसराज विश्वकर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सरकार की जनहितकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और विकास कार्यों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और हर पात्र लाभार्थी को पारदर्शी तरीके से सुविधाएं मिलें।

मंत्री ने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण एवं किसान कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकार के कार्यों को भी विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम में भूपेश चौबे, भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।


लेकिन इस सरकारी आयोजन की चमक उस समय फीकी पड़ गई जब पत्रकारों ने कार्यक्रम में भारी अव्यवस्था और उपेक्षा पर खुलकर नाराजगी जताई। पत्रकारों का कहना था कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को जिस सम्मान और सुविधा की अपेक्षा होती है, वह इस आयोजन में पूरी तरह नदारद रही।

पत्रकारों ने आरोप लगाया कि चतरा ब्लॉक प्रशासन और बीडीओ की लापरवाही के कारण कार्यक्रम स्थल पर मीडिया कर्मियों के बैठने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई। ऐसी स्थिति में पत्रकारों को पूरे कार्यक्रम के दौरान बाहर ही खड़े होकर या इधर-उधर घूमकर कवरेज करनी पड़ी। इतना ही नहीं, आम जनता भी कार्यक्रम स्थल के बाहर ही खड़ी रही क्योंकि अंदर पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं था।

पत्रकारों ने कड़े शब्दों में कहा कि जिस कार्यक्रम में पत्रकारों को सम्मानपूर्वक बैठने तक की व्यवस्था न हो, ऐसे आयोजनों का बहिष्कार करना पड़े तो यह प्रशासन की विफलता मानी जाएगी। उनका कहना था कि यदि शासन-प्रशासन जनता तक अपनी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना चाहता है, तो मीडिया की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


पत्रकारों ने मांग उठाई कि भविष्य में ऐसे बड़े कार्यक्रमों के लिए ऐसे स्थलों का चयन किया जाए जहां मंत्री, अधिकारी, जनता और मीडिया—सभी के लिए पर्याप्त एवं सम्मानजनक व्यवस्था हो। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में अव्यवस्था और भेदभावपूर्ण व्यवस्था न केवल आयोजन की गरिमा कम करती है, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

चतरा में हुए इस आयोजन ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सरकार सुशासन और जनसंपर्क की बात करती है, तो क्या लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को नजरअंदाज करना उचित है? पत्रकारों की नाराजगी अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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