ब्लास्टिंग के साये में जिंदगी, जिम्मेदार खामोश
सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर कमलेश कुमार सिंह
सिंगरौली । सार्वजनिक उपक्रम नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) की जयंत परियोजना से जुड़ा एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। खदान क्षेत्र में वर्षों से निवास कर रहे दर्जनभर से अधिक बैगा परिवार आज भी बदहाल और भयावह परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार, विस्थापन और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी न होने के बावजूद एनसीएल प्रबंधन द्वारा इन परिवारों के घरों के चारों ओर खदान की खुदाई कर दी गई है। हालात यह हैं कि चारों तरफ भारी मशीनों की गूंज और लगातार हो रही ब्लास्टिंग के बीच ये परिवार दिन-रात खतरे के साये में जी रहे हैं।
*विकास के दावे, जमीनी हकीकत उलट*
एनसीएल प्रबंधन क्षेत्र में विकास और सामाजिक उत्थान के बड़े-बड़े दावे करता रहा है, लेकिन इन बैगा परिवारों की स्थिति उन दावों की सच्चाई बयां कर रही है। सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी साफ दिखाई देती है, जिससे लोगों में आक्रोश और चिंता दोनों बढ़ रहे हैं।
*मदद के नाम पर खानापूर्ति?*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा कभी-कभार सहायता देकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश की जाती है, जबकि असल मुद्दा—सुरक्षित पुनर्वास—अब तक अधूरा है।
*जनप्रतिनिधि और प्रशासन पर सवाल*
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन और अनुसूचित जनजाति आयोग की ओर से कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है। प्रभावित परिवार आज भी न्याय और सुरक्षित जीवन की आस लगाए बैठे हैं।
*खतरे के बीच गुजर-बसर*
खदान के बीच फंसे ये परिवार न केवल खुद बल्कि अपने मवेशियों के साथ खतरनाक रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। हर पल दुर्घटना का डर बना रहता है, लेकिन समाधान अब तक दूर है।
👉 कुल मिलाकर, यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि विकास की कीमत आखिर किसे चुकानी पड़ रही है।


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