पत्रकार के नाम पर हजारों की उगाही, साइबर ठगों का खतरनाक जाल बेनकाब

 *व्हाट्सएप हैक कर ठगी का बड़ा खेल!* 

 


*“आतिफ कलेक्शन”* के फर्जी बारकोड से वसूली, इमोशनल ब्लैकमेलिंग कर लोगों को बनाया निशाना 

*खबर विस्तार से:* 

दिनांक 25 अप्रैल 2026 को एक चौंकाने वाली साइबर ठगी की घटना सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। वरिष्ठ पत्रकार रामआश्रय बिंद का मोबाइल साइबर अपराधियों द्वारा हैक कर लिया गया और उनके व्हाट्सएप अकाउंट पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया गया।

हैकर्स ने बेहद शातिर तरीके से “आतिफ कलेक्शन” नाम से फर्जी बारकोड बनाकर संपर्क सूची में जुड़े लोगों से पैसे की मांग शुरू कर दी। 5000, 8000 से लेकर 10000 रुपये तक की रकम अलग-अलग लोगों से मांगी गई।

 *पहले बच्चों को बनाया निशाना, वहीं से खुली ठगी की पोल


साइबर अपराधियों ने सबसे पहले पत्रकार के बच्चों को टारगेट किया, जिससे मामले की सच्चाई सामने आई। परिजनों के फोन आने के बाद तत्काल स्थिति स्पष्ट हुई और सभी परिचितों को अलर्ट किया गया।

इसके बावजूद भी कुछ लोग झांसे में आकर 1500 से 2000 रुपये तक की रकम ठगों को भेज बैठे।

*चार ग्रुप बनाकर एक साथ 1000  लोगों को बनाया शिकार* 


हैकर्स ने व्हाट्सएप पर चार नए ग्रुप बनाकर हर ग्रुप में लगभग 250 लोगों को जोड़ दिया, ताकि एक साथ बड़े स्तर पर मैसेज भेजकर ठगी को अंजाम दिया जा सके।

जिसने भी मैसेज का जवाब दिया, उसे अलग से चैट कर इमोशनल ब्लैकमेलिंग की गई।

*चूंकि हार्ट पेशेंट है पत्रकार रामआश्रय बिंद, हैकर ने रच डाली सहानुभूति की साजिश* 

हैकर ठगों ने खुद को पत्रकार बताते हुए कहा—

“मेरा UPI काम नहीं कर रहा है, इस बारकोड पर पैसा भेज दीजिए, मैं शाम 6-7 बजे तक वापस कर दूंगा… 

चूंकि पत्रकार की बीमारी की जानकारी कई लोगों को पहले से थी, इसलिए कई लोग इस जाल में फंसने लगे। हालांकि सतर्क लोगों ने पहले फोन कर पुष्टि की, जिससे बड़ा नुकसान टल गया।

*फोन की बाढ़ – एक ही सवाल: “आप पैसे क्यों मांग रहे हैं?”* 

घटना के बाद रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के लगातार फोन आने लगे। सभी का एक ही सवाल था—“आप पैसों की मांग क्यों कर रहे हैं?” इस पर तुरंत स्पष्ट किया गया कि यह पूरी तरह साइबर फ्रॉड है और मोबाइल हैक कर इस वारदात को अंजाम दिया गया है।

*खुलासा: खुद कभी नहीं करते ऑनलाइन लेनदेन* 


पत्रकार रामआश्रय बिंद ने साफ किया कि वह स्वयं मोबाइल से किसी प्रकार का लेनदेन नहीं करते, उनके सभी आर्थिक कार्य बच्चे संभालते हैं। इसके बावजूद भी उनकी पहचान का गलत फायदा उठाकर ठगी की गई।


*चेतावनी और अपील: सावधान रहें, सतर्क रहें*
 

यह घटना साफ दर्शाती है कि साइबर अपराधी अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और चालाक हो चुके हैं।

👉 किसी भी व्हाट्सएप मैसेज या बारकोड के जरिए पैसे मांगने पर तुरंत भरोसा न करें।

👉 पहले संबंधित व्यक्ति से फोन कॉल के जरिए पुष्टि अवश्य करें।

👉 अनजान लिंक, QR कोड या बारकोड को स्कैन करने से बचें।

 *प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग* 

इस गंभीर साइबर अपराध को देखते हुए प्रशासन से मांग की गई है कि ऐसे गिरोहों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए और आम जनता को इस तरह की ठगी से बचाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

*संदेश साफ है:* 

अब साइबर ठग सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि भावनाओं से भी हमला कर रहे हैं…

सतर्क रहें, वरना अगला शिकार आप भी हो सकते हैं!

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