*“मजदूर का दिन – 1 मई”*
ईंटों में जान, पसीने में आग है,
मजदूर ही देश की असली पहचान है।
धूप में जलकर जो छाया बनाता है,
वही तो हर शहर को सजाता है।
हाथों में छाले, मगर हौसला बुलंद,
हर दर्द के आगे रहता है अडिग और प्रचंड।
वो थकता नहीं, वो रुकता नहीं,
किस्मत से कभी झुकता नहीं।
महलों की नींव में उसका लहू है,
हर ऊँची इमारत में उसका जज़्बा रु-ब-रू है।
पर अफसोस, वही गुमनाम रहता है,
जो हर सपने को साकार करता है।
आज 1 मई है, उसका सम्मान करो,
उसके हक की हर आवाज़ को पहचान करो।
जिसने बनाया है ये दुनिया सारी,
आज उसके नाम करो ये खुशियाँ हमारी।
ना समझो कमजोर उसे, वो तूफान है,
मजदूर ही भारत की असली शान है।
✍️ रामआश्रय बिंद
पत्रकार एवं आर्टिस्ट
📞 9554175344 / 9335932664

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