सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद बिंद
मीरजापुर/विंध्याचल। विंध्याचल क्षेत्र के शिवपुरा स्थित रामगया गंगा घाट पर अमावस्या के अवसर पर रविवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्म मुहूर्त से ही घाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर शाम तक जारी रहा। हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और दान-पुण्य किया।
अमावस्या के अवसर पर रामगया घाट पर पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि यहां पिंडदान एवं तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते प्रयागराज, वाराणसी, भदोही, सोनभद्र सहित आसपास के जनपदों के अलावा बिहार प्रांत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु विंध्याचल पहुंचे।
घाट पर स्थानीय पुरोहितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं को पिंडदान और तर्पण की धार्मिक प्रक्रिया संपन्न कराई गई। सुबह से ही घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और धार्मिक अनुष्ठानों के चलते मेले जैसा माहौल बना रहा।
सुरक्षा को लेकर प्रशासन रहा मुस्तैद
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विंध्याचल थाना पुलिस एवं प्रशासन की टीम घाटों पर लगातार निगरानी करती रही। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर घाटों पर बैरिकेडिंग की गई तथा गंगा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए गोताखोरों की टीम तैनात रही। नगर पालिका की ओर से घाटों पर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य जरूरी इंतजाम किए गए।
स्थानीय पुरोहितों और श्रद्धालुओं के अनुसार रामगया घाट का पौराणिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने भी यहां पिंडदान किया था, जिसके चलते इसे ‘छोटा गया’ के नाम से भी जाना जाता है। अमावस्या के दिन यहां दूर-दूर से लोग अपने पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचते हैं।
प्रशासनिक अनुमान के अनुसार अमावस्या के अवसर पर करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं के पिंडदान करने की संभावना जताई गई। देर शाम तक घाट पर श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला जारी रहा।

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