सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर शिव प्रताप सिंह
ओबरा सोनभद्र । ओबरा नगर पंचायत में एक बार फिर भ्रष्टाचार और मनमानी का मामला खुलकर सामने आया है। मौके पर पहुंचे अधिशासी अधिकारी अखिलेश सिंह ने समस्या का समाधान करने के बजाय अपने स्टाफ और ठेकेदार को बचाने का प्रयास किया। हैरानी की बात तब हुई जब उन्होंने शिकायतकर्ता के पति और बच्चों से ही यह सवाल पूछना शुरू कर दिया कि “खर्चा कौन देगा”, जबकि गलती साफ तौर पर नगर पंचायत और उसके ठेकेदार की बताई जा रही है।
मौके पर मौजूद रिपोर्टर ने जब सार्वजनिक रास्ते पर हुए अतिक्रमण को हटाने की बात कही और संबंधित वीडियो क्लिप भी दिखाए, तो अधिशासी अधिकारी मुद्दे से भटकते हुए खुद ही “सार्वजनिक रास्ते” की परिभाषा समझाने लगे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यह रास्ता सार्वजनिक नहीं है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर रास्ता सार्वजनिक नहीं है, तो फिर नगर पंचायत ने उसी जगह पर सड़क और नाली का टेंडर क्यों निकाला और निर्माण कार्य कैसे शुरू कर दिया?
इतना ही नहीं, आरोप है कि दबंगई के साथ ठेकेदार द्वारा शिकायतकर्ता की निजी जमीन में जबरन घुसकर नाली का निर्माण किया गया। आखिर नगर पंचायत को यह अधिकार किसने दिया? क्या यह पूरा मामला सुनियोजित भ्रष्टाचार का हिस्सा है?
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब लेखपाल ने स्पष्ट रूप से यह स्वीकार किया कि करीब 2 फीट जमीन शिकायतकर्ता की है और उस पर गलत तरीके से नाली बनाई गई है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं।
अब सवाल यह है कि इस पूरे खेल के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं? आखिर क्यों अधिशासी अधिकारी दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने में जुटे हैं? क्या इस मामले में भी सब कुछ दबा दिया जाएगा या फिर सच्चाई सामने आएगी — यह देखने वाली बात होगी।





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