“डॉक्टर दो या आंदोलन झेलो!” — कोन अस्पताल में स्पेशलिस्ट की मांग पर भड़का जनआक्रोश
सोन की आवाज रिपोर्टर सोनभद्र रामविलास निषाद
सोनभद्र। रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत निगाई में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़ा जन आंदोलन खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय नव निर्माण सेना ट्रस्ट के बैनर तले कोन के सरकारी अस्पताल में महिला डॉक्टर और हड्डी रोग विशेषज्ञ (ऑर्थोपेडिक) की तैनाती की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। इस आंदोलन की कमान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनन्द पटेल दयालु ने संभाल रखी है, जिन्होंने साफ चेतावनी दी है कि जब तक स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होगी, तब तक संघर्ष किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगा।
गांव-गांव गूंज रहे इस आंदोलन के तहत व्यापक स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया और जन जागरूकता रैली निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा सड़कों पर उतरे और एक स्वर में अपनी आवाज बुलंद की। करीब 2 लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र में आज तक स्पेशलिस्ट डॉक्टर की व्यवस्था न होना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन गया है।
सबसे ज्यादा परेशानी क्षेत्र की माताओं और बहनों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें इलाज के लिए करीब 70 किलोमीटर दूर जाना मजबूरी बन गया है। इससे न सिर्फ आर्थिक बोझ बढ़ रहा है बल्कि कई बार समय पर इलाज न मिलने से गंभीर हालात भी पैदा हो रहे हैं।
आनन्द पटेल दयालु ने दो टूक कहा कि यह केवल स्वास्थ्य सुविधा का मामला नहीं, बल्कि जनता के अधिकार, सम्मान और जीवन से जुड़ा सवाल है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि इस जन आंदोलन से जुड़ें, हस्ताक्षर करें और अपनी आवाज को इतना बुलंद करें कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और प्रशासन जागने को मजबूर हो जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जब जनता जागरूक होकर सही प्रतिनिधियों का चुनाव करेगी, तभी क्षेत्र की मूल समस्याओं का समाधान संभव होगा और वास्तविक विकास का रास्ता खुलेगा।
इस आंदोलन में प्रदेश अध्यक्ष महताब आलम, प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष कनौजिया, दशरथ पटेल, उमेश पटेल, राजकुमार गुप्ता, इंद्रेश पटेल, अमित सिंह, अशोक कुमार पटेल, चंद्रशेखर सिंह, विजय सिंह, नोजू उर्फ पटेल, पप्पू पटेल, बालकिशन पटेल, सतीश गुप्ता, नन्दलाल पटेल, दिनेश कुमार प्रजापति, सुनील कुमार, शिवम, अमन उर्फ अरुण कुमार, देवकुमार पटेल सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
अब यह आंदोलन सिर्फ निगाई गांव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैलाकर इसे जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
ग्रामीणों ने एकजुट होकर साफ कर दिया है—“जब तक कोन अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं आएंगे, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।”

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