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गांधी के विचारों पर छिड़ी तर्कों की जंग, सान्या भारद्वाज ने मारी बाजी

 सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर राम पुकार प्रसाद 

सत्य-अहिंसा की प्रासंगिकता पर विद्यार्थियों ने रखे दमदार तर्क, रिषा द्वितीय और वैष्णवी तृतीय


ओबरा (सोनभद्र)।
गांधी जयंती के अवसर पर शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज में गुरुवार को विचारों और तर्कों की रोचक जंग देखने को मिली। विद्यालय में ‘गांधीवादी जीवन-दृष्टि आज भी प्रासंगिक है’ विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष में प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत करते हुए अपनी तार्किक क्षमता, अभिव्यक्ति कौशल और आत्मविश्वास का शानदार परिचय दिया।

पक्ष में बोलते हुए विद्यार्थियों ने कहा कि आज के समय में झूठ, दिखावा, हिंसा, बढ़ता उपभोक्तावाद और सामाजिक तनाव जैसी चुनौतियों के बीच महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, सादगी, सेवा और स्वावलंबन के विचार समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यार्थियों ने तर्क दिया कि गांधीवादी जीवन-दृष्टि केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में भी मार्गदर्शन देने वाली विचारधारा है।

वहीं विपक्ष में विद्यार्थियों ने अपने तर्क रखते हुए कहा कि गांधीजी के समय की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां आज से काफी अलग थीं। आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक, वैश्विक अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा बड़े पैमाने पर विकास की आवश्यकताओं के बीच गांधीवादी विचारों को उसी स्वरूप में लागू करना व्यावहारिक चुनौती हो सकता है।

प्रतियोगिता के दौरान दोनों पक्षों के प्रतिभागियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ एक-दूसरे के तर्कों का जवाब दिया। वक्ताओं ने गांधीवादी विचारों को आंख मूंदकर स्वीकार करने या पूरी तरह खारिज करने के बजाय बदलते समय और परिस्थितियों के अनुरूप उनकी उपयोगिता तथा सीमाओं को समझने पर जोर दिया। विद्यार्थियों के तर्कों और प्रस्तुति ने कार्यक्रम को खासा रोचक बना दिया।

सान्या ने हासिल किया प्रथम स्थान

प्रतियोगिता के परिणाम में कक्षा 12 की सान्या भारद्वाज ने प्रथम, कक्षा 11 की रिषा कुमारी ने द्वितीय तथा कक्षा 11 की वैष्णवी अग्रहरि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों के प्रदर्शन की उपस्थित लोगों ने सराहना की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य मुकुंद सिंह गौर ने की। उन्होंने कहा कि वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में तर्कशक्ति विकसित करने के साथ-साथ अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखने का आत्मविश्वास भी बढ़ाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों से प्रेरणा लेकर उन्हें व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन आचार्य प्रमोद चौबे ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।





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