सोन की आवाज न्यूज़ प्रधान संपादक रामआश्रय बिंद
गाड़ी पकड़े जाने के बाद नगर पंचायत के अधिकारी राजपति जी का नाम सामने आने का दावा, पूछताछ में ऊपर तक जुड़े लोगों के नाम बताए जाने का आरोप
ओबरा (सोनभद्र)। नगर पंचायत क्षेत्र स्थित गौशाला के समीप कथित तौर पर गौवंश के सिर और हड्डियों से भरी पिकअप पकड़े जाने के मामले ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। गौ सेवकों का दावा है कि पिकअप में करीब 120 गौवंश के सिर एवं हड्डियां बरामद हुईं। घटना के बाद नगर पंचायत की गौशाला व्यवस्था और उससे जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
गौ सेवकों के अनुसार, वाहन पकड़े जाने के बाद पूछताछ में नगर पंचायत के अधिकारी राजपति जी का नाम सामने आया। आरोप है कि जब उनसे मामले को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर अपने से ऊपर के अधिकारियों के नामों का भी उल्लेख किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मामले को लेकर गौवंश रक्षा सुरक्षा सेवा समिति, ओबरा-सोनभद्र से जुड़े गौ सेवकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि गौशाला जैसी व्यवस्था के आसपास ही इस प्रकार का गंभीर मामला सामने आता है तो इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
गौशाला कर्मचारी पर नगर अध्यक्ष से अभद्रता का आरोप
गौ सेवकों ने एक अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वाहन को पकड़े जाने के बाद नगर अध्यक्ष भानु प्रताप जी जब गौशाला पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने कथित तौर पर उनके साथ अभद्रता की। आरोप है कि उनका कॉलर पकड़ा गया, धक्का दिया गया और उन्हें गौशाला से बाहर निकाल दिया गया।
गौ सेवकों का कहना है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि या गौसेवक द्वारा गौवंश से जुड़े संदिग्ध मामले पर सवाल उठाया जाता है तो उसके साथ अभद्र व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। समिति ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
“योगी जी अकेले क्या-क्या करेंगे?”—गौ सेवकों का सवाल
गौ सेवकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार गौ संरक्षण को लेकर गंभीर है, लेकिन नीचे के स्तर पर यदि अधिकारी-कर्मचारी ही व्यवस्था को बदनाम करने वाले कृत्यों में संलिप्त पाए जाते हैं तो सरकार की छवि पर भी सवाल उठते हैं।
गौ सेवकों ने कहा कि “हमारे माननीय योगी जी अकेले हर मामले की निगरानी नहीं कर सकते। नीचे के स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सरकार की नीतियों की आड़ में कथित धांधली कर मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
गौ सेवकों ने मांग की कि पिकअप वाहन में मिले कथित गौवंश के अवशेषों की वैज्ञानिक जांच, वाहन के मालिक एवं चालक की पूछताछ, गौशाला के रिकॉर्ड की जांच, सीसीटीवी फुटेज की जांच तथा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
गौवंश रक्षा सुरक्षा सेवा समिति, ओबरा-सोनभद्र ने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो गौ सेवक लोकतांत्रिक तरीके से आवाज बुलंद करेंगे।
जय गौ माता। 🙏⛳


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