Top News

1965 से कब्जे वाली भूमि को लेकर घमासान, 2013 के लिखित समझौते के बावजूद कब्जे का आरोप

 

शिकायतकर्ता का दावा—पूर्व प्रधान, अधिवक्ता व उनके परिजनों पर फर्जी बैनामा, धमकी और मिलीभगत के गंभीर आरोप; पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी उठाए सवाल

सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर राम पुकार प्रसाद 


दुद्धी (सोनभद्र)।
1965 से कब्जे में बताई जा रही भूमि को लेकर चल रहा विवाद अब गंभीर आरोप-प्रत्यारोप के बीच तूल पकड़ता जा रहा है। शिकायतकर्ता विनोद कुमार पुत्र त्रिवेणी राम ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2013 में तत्कालीन ग्राम प्रधान राजेश धूसिया की मौजूदगी में स्टाम्प पर लिखित समझौता कराया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, विजय एवं रामवृक्ष पुत्रगण नकछेदी ने उस समय कथित रूप से यह स्वीकार किया था कि संबंधित भूमि उनके दादा त्रिवेणी को बेची गई थी।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद वर्षों पुराने भूमि विवाद का समाधान नहीं हुआ और अब भूमि पर कब्जे तथा दस्तावेजों में कथित हेरफेर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

अपने ही वकील पर विश्वासघात का आरोप, पूर्व प्रधान व परिजनों पर फर्जी बैनामे का गंभीर दावा

शिकायतकर्ता विनोद कुमार ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2013 से मामले में मनोज आजाद अधिवक्ता के रूप में पैरवी करते रहे हैं और उन्हें पूर्व प्रधान राजेश धूसिया का सगा भाई बताया गया है। मामला वर्तमान में दुद्धी न्यायालय में विनोद बनाम रामवृक्ष सिविल वाद के रूप में विचाराधीन बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी बीच पूर्व प्रधान राजेश धूसिया, उनके भाई एवं अधिवक्ता मनोज आजाद तथा राजेश धूसिया के पुत्र व जूनियर अधिवक्ता माइकल धूसिया और संजीव धूसिया के माध्यम से विपक्षी पक्ष से कथित मिलीभगत कर विवादित भूमि का बैनामा अपने ही परिवार के सदस्यों के नाम कराने का प्रयास किया गया।

शिकायतकर्ता के मुताबिक कथित बैनामा राजेश धूसिया की पत्नी कलावती देवी और बेटी मोनिका के नाम कराया गया। शिकायतकर्ता ने इसे 1965 से कब्जे वाली भूमि से जुड़े तथ्यों को छिपाकर किया गया कथित लेन-देन बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

धमकी और दबाव बनाने का आरोप, पुलिस पर भी मिलीभगत के सवाल


विनोद कुमार का आरोप है कि भूमि विवाद को लेकर उन्हें लगातार धमकाया जा रहा है तथा दबाव बनाकर उन्हें उनके अधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह वर्षों से अपनी भूमि और न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है तथा साधारण ठेला चलाकर अपने परिवार का जीवनयापन करता है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 23 अगस्त को हुई घटना के संबंध में दी गई तहरीर पर कार्रवाई में कथित रूप से बदलाव कराया गया और उसे कई दिनों तक थाने के चक्कर लगाने पड़े। आरोप यह भी है कि घटना से संबंधित एफआईआर दर्ज होने के लगभग 21 दिन बाद शिकायतकर्ता पक्ष के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

शिकायतकर्ता ने इसे पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल बताते हुए पूरे प्रकरण की वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में जांच कराने की मांग की है।

2013 के स्टाम्प से लेकर कथित बैनामे तक जांच की मांग


पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि वर्ष 2013 में स्टाम्प पर हुए कथित लिखित समझौते की जांच कराई जाए। साथ ही विवादित भूमि से संबंधित पुराने दस्तावेज, राजस्व अभिलेख, कथित बैनामे तथा भूमि के कब्जे की स्थिति की निष्पक्ष जांच हो।

शिकायतकर्ता ने 23 अगस्त की घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कराने की मांग भी की है। उसका कहना है कि जांच स्थानीय स्तर के बजाय किसी वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में कराई जाए, जिससे किसी भी पक्ष के प्रभाव अथवा दबाव की संभावना समाप्त हो सके।

शिकायतकर्ता ने विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने तथा कथित जबरन कब्जे के प्रयास की तत्काल जांच कराने की भी मांग की है।

शिकायतकर्ता विनोद कुमार पुत्र त्रिवेणी राम का कहना है कि 1965 से चली आ रही भूमि पर उनके परिवार के कब्जे और वर्ष 2013 के कथित लिखित समझौते के बावजूद यदि उनके खिलाफ ही मुकदमे और दबाव की कार्रवाई होती है, तो यह उनके साथ गंभीर अन्याय होगा। उन्होंने उच्चाधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।

नोट: समाचार में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी है। पूर्व प्रधान राजेश धूसिया, अधिवक्ता मनोज आजाद, माइकल धूसिया, संजीव धूसिया, कलावती देवी, मोनिका तथा संबंधित पुलिस पक्ष का आधिकारिक जवाब प्राप्त होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना उचित होगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post
 Son Ki Awaz News
 Son Ki Awaz News

🎧 LIVE FM RADIO




🔊 Volume