यूँ महक आती है इनसे, जाफरानी लोग हैं
आज भी जिंदा मोहब्बत की निशानी लोग हैं
वक्त के तूफान भी जिनको झुका पाए नहीं,
हौसलों की मिसाल हैं, वो कहानी लोग हैं
ये किसी सूरत पे अपना सर झुका सकते नहीं,
अपनी आन-बान के रखवाले, स्वाभिमानी लोग हैं
इनकी मजबूरी नहीं, बस फितरतों की बात है,
रिवायतों में ढले हुए, ये खानदानी लोग हैं
रंग बदलना सीखा नहीं इनकी फितरत ने कभी,
साफ दिल, सच्चे जज़्बातों की रवानी लोग हैं
दौर चाहे जैसा आए, ये बदलते ही नहीं,
अपनी मिट्टी से जुड़े, वो जुबानी लोग हैं
झूठ के बाज़ार में भी सच को जिंदा रख रहे,
हर सदी में चमकते हुए नूरानी लोग हैं
नाम ही काफी है जिनका, पहचान के लिए,
भीड़ में भी अलग दिखते, वो बेमिसाल लोग हैं
✍️ पत्रकार यासीन खान ✍️
*गहरे अर्थ और शब्द-शक्ति*
इस ग़ज़ल में पत्रकार यासीन खान ने कुछ बहुत खूबसूरत शब्दों का प्रयोग किया है:
जाफरानी (Saffron-like): जिस तरह जाफरान अपनी खुशबू और कीमती होने के लिए जाना जाता है, वैसे ही ये लोग अपने चरित्र की महक से पहचाने जाते हैं।
मोहब्बत की निशानी: जहाँ आज दुनिया मतलबी हो गई है, वहाँ ये लोग प्रेम और इंसानियत का प्रतीक हैं।
खानदानी (Noble/Legacy): यहाँ खानदानी का अर्थ केवल ऊंचे कुल से नहीं, बल्कि उन 'संस्कारों' से है जो इंसान को झुकने या गलत समझौता करने से रोकते हैं।
इन पंक्तियों का सार यही है कि स्वाभिमान (Self-respect) जब इंसान के खून में होता है, तो वह मर मिटना पसंद करता है पर झुकना नहीं।

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