एनसीएल की जमीन पर भवन निर्माण को लेकर विवाद, अवैध कब्जे की आशंका
पुनर्वास प्लॉट की निर्धारित सीमा से अधिक भूमि पर निर्माण का आरोप, सुरक्षा कर्मियों की रोक के बावजूद काम जारी रहने का दावा
अनपरा/सोनभद्र। अनपरा थाना क्षेत्र के ग्राम रेहटा में एनसीएल ककरी परियोजना की भूमि पर भवन निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने एनसीएल की भूमि पर कथित अनधिकृत कब्जे और निर्माण की आशंका जताते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का दावा है कि एनसीएल के सुरक्षा कर्मियों द्वारा निर्माण कार्य रोकने की बात कहे जाने के बावजूद मौके पर निर्माण जारी रखा गया।
ग्रामीणों के अनुसार, मामला पुनर्वास प्लॉट संख्या 107 से भी जुड़ा है। बताया जा रहा है कि उक्त प्लॉट का निर्धारित क्षेत्रफल 60×40 वर्ग फीट है, जबकि आरोप है कि निर्धारित सीमा से अधिक भूमि पर कब्जा कर भवन निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
रामदयाल और हीरालाल से जुड़े भूमि प्रकरणों की जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने एनसीएल ककरी परियोजना में कार्यरत बताए जा रहे रामदयाल उर्फ रामू पुत्र सागर तथा हीरालाल पुत्र जोखन से जुड़े भूमि एवं भवन निर्माण संबंधी मामलों की भी जांच कराने की मांग उठाई है। आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि के स्वामित्व, आवंटन और कब्जे की स्थिति की पूरी तरह से जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि भूमि वास्तव में एनसीएल की संपत्ति है, तो उस पर किसी भी प्रकार का निर्माण, हस्तांतरण अथवा खरीद-बिक्री किस आधार पर की गई, इसकी जांच राजस्व अभिलेखों और एनसीएल के आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए।
सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि सरकारी अथवा एनसीएल की भूमि की खरीद-बिक्री और उस पर कब्जे की गतिविधियों की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि यदि संबंधित भूमि सरकारी संपत्ति अथवा एनसीएल के स्वामित्व में पाई जाती है तो बिना सक्षम अनुमति किए गए किसी भी निर्माण या हस्तांतरण की वैधानिकता की जांच जरूरी है।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि रामदयाल उर्फ रामू से जुड़े अन्य प्लॉट संबंधी प्रकरण भी थाना अनपरा और एनसीएल ककरी परियोजना के संज्ञान में लाए गए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पूर्व में दी गई शिकायतों, राजस्व अभिलेखों, पुनर्वास प्लॉट के आवंटन दस्तावेजों तथा एनसीएल के भूमि रिकॉर्ड की संयुक्त रूप से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
मामले में ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मौके का स्थलीय निरीक्षण कराने, भूमि की पैमाइश कराने तथा स्वामित्व एवं आवंटन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण निर्धारित प्लॉट की सीमा में है या एनसीएल की भूमि पर अतिक्रमण का मामला है।
फिलहाल लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित एनसीएल अधिकारियों और आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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