सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर राम पुकार प्रसाद
40 गाटों की 5.7142 हेक्टेयर भूमि ग्राम सभा में निहित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार
सोनभद्र। दुद्धी तहसील के बघाड़ू गांव में जनजातीय भूमि से जुड़े चर्चित प्रकरण में जिला प्रशासन की कार्रवाई को इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत मिली है। प्रशासन के अनुसार, जनजातीय महिला रजिया उर्फ नन्हकी के नाम पर कराए गए बैनामों को शून्य घोषित कर 40 गाटों की 5.7142 हेक्टेयर भूमि ग्राम सभा में निहित करने की कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाई कोर्ट ने प्रशासन के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के मुताबिक, प्रकरण सामने आने के बाद जांच में जनजातीय भूमि के हस्तांतरण से जुड़े कई तथ्य सामने आए थे। प्रशासन का कहना है कि रजिया के नाम पर उसकी पुरानी पहचान के आधार पर एससी-एसटी भूमि की खरीद की गई और बाद में इन जमीनों को अन्य लोगों के पक्ष में स्थानांतरित किया गया। कार्रवाई के तहत प्रशासन ने संबंधित बैनामों को शून्य घोषित करते हुए भूमि ग्राम सभा में निहित कर दी थी।
पांच महीने से कम समय में हुई सुनवाई
जिला प्रशासन के अनुसार, कार्रवाई के खिलाफ रजिया ने अप्रैल में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासन द्वारा विवादित भूमि को ग्राम सभा में निहित करने की कार्रवाई में हस्तक्षेप से इनकार किया। प्रशासन ने इसे अपनी कानूनी पैरवी की महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
अब जमीन पर बनेगा खेल मैदान और बारात घर
प्रशासन ने अब ग्राम सभा में निहित भूमि के जनहित में उपयोग की तैयारी शुरू कर दी है। जिलाधिकारी के अनुसार, क्षेत्र के बच्चों के लिए खेल मैदान, स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए बारात घर और समाज सुधारक बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। शेष भूमि पर शासकीय भवनों के निर्माण की भी तैयारी की जा रही है।
जनजातीय पहचान और विधिक संरक्षण पर अदालत में हुई चर्चा
प्रशासन के अनुसार, सुनवाई के दौरान जनजातीय परंपरा और समुदाय से जुड़ाव के साक्ष्यों को लेकर भी चर्चा हुई। अदालत के समक्ष यह सवाल रहा कि लंबे समय तक दूसरे धर्म और रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन व्यतीत करने के बाद संबंधित व्यक्ति द्वारा अनुसूचित जनजाति के विधिक संरक्षण का दावा किन परिस्थितियों में किया जा सकता है।
प्रशासन ने बघाड़ू प्रकरण में हुई कार्रवाई को जनजातीय भूमि की सुरक्षा और सार्वजनिक उपयोग के लिए भूमि संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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