कार्यक्रम के समय ही सक्रिय होते हैं सफाई कर्मी! अधिकारियों की कथित गैरमौजूदगी पर भी उठे सवाल, डीएम से जांच की मांग
सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद बिंद
रामगढ़/सोनभद्र। चतरा ब्लॉक परिसर में सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि ब्लॉक में तैनात सफाई कर्मियों द्वारा नियमित रूप से झाड़ू एवं साफ-सफाई नहीं की जाती है। जब किसी मंत्री, विधायक या जिलाधिकारी का कार्यक्रम होता है, तभी सफाई कर्मियों को कुछ समय के लिए बुलाकर ब्लॉक परिसर की सफाई कराई जाती है। इसके बाद कथित रूप से उनसे कपड़े बदलवाकर कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए भी लगाया जाता है।
वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मियों का मूल दायित्व विद्यालयों एवं उनके आसपास साफ-सफाई बनाए रखना है, लेकिन क्षेत्र के कई विद्यालयों के आसपास गंदगी एवं कूड़े का अंबार दिखाई देता है। इस संबंध में वीडियो पंचायत को सूचना दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
*ब्लॉक कार्यालय के संचालन को लेकर भी उठे सवाल*
बताया जाता है कि वीडियो पंचायत का कार्यालय सुबह करीब 7 बजे खुल जाता है, जबकि अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी कथित रूप से सुबह 10 से 11 बजे के बाद ही ब्लॉक में पहुंचते हैं। बुधवार को ब्लॉक का मुख्य द्वार चपरासी द्वारा खोले जाने की बात सामने आई, लेकिन आरोप है कि परिसर में कोई अधिकारी मौजूद नहीं था।
इसको लेकर सवाल उठ रहा है कि यदि बुधवार को ब्लॉक कार्यालय बंद था तो मुख्य द्वार दिनभर खुला क्यों रखा गया? वहीं यदि कार्यालय खुला था तो अधिकारी एवं संबंधित कर्मचारी कहां थे? स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है।
*ब्लॉक परिसर में जलजमाव से बढ़ा संक्रमण का खतरा*
ब्लॉक परिसर में नालियां जाम होने के कारण लंबे समय से जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। पानी जमा रहने से मच्छर एवं अन्य कीटाणुओं के पनपने की आशंका बनी हुई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। आरोप है कि यदि नियमित रूप से नालियों की सफाई कराई जाए तो जलजमाव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वीडियो पंचायत के कार्यालय के बाहर भी जलजमाव की समस्या बनी रहती है, लेकिन इस ओर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान नहीं जाता। लोगों का आरोप है कि अधिकारी वाहन से सीधे अपने कार्यालय तक पहुंचते हैं, जिसके कारण उन्हें परिसर की वास्तविक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता, जबकि आम जनता को आने-जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
*जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग*
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी सोनभद्र से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जांच में यदि लापरवाही, सरकारी दायित्वों की अनदेखी अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी व्यवस्था में सुधार हो और आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
नोट: उपरोक्त आरोप स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों का पक्ष जांच के बाद सामने आने पर समाचार में शामिल किया जाना उचित होगा।

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