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जागो देशवासियों! वरना प्रकृति से खिलवाड़ लाएगा भयंकर परिणाम

 


प्रकृति बचाओ, जन-जागरण अभियान चलाएगा अंतरराष्ट्रीय मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन


कानपुर नगर।
गोपाल नगर स्थित महानगर इकाई कार्यालय से अंतरराष्ट्रीय मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने देशवासियों से प्रकृति संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया। महानगर इकाई के संरक्षक एवं वरिष्ठ पत्रकार अशोक सिंह ‘दद्दा’ ने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन विकराल रूप धारण कर मानवता के सामने खड़ा है। इसके गंभीर परिणामों के प्रति वैज्ञानिक, पर्यावरणविद और मनीषी लंबे समय से चेताते आ रहे हैं, लेकिन आधुनिक जीवन की सुख-सुविधाओं की दौड़ में हम लगातार प्रकृति की चेतावनियों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संकट अब मानवता के दरवाजे पर दस्तक नहीं, बल्कि जोरदार दस्तक दे रहा है। यदि समय रहते सामूहिक और सकारात्मक प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसके भयावह परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

अशोक सिंह ‘दद्दा’ ने कहा कि वर्ष 2023 में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भीषण गर्मी, अत्यधिक वर्षा, बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का नहीं, बल्कि वर्तमान का गंभीर संकट बन चुका है। वर्ष 1880 से मौसम संबंधी रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से दर्ज किए जाने के बाद 2023 को अत्यधिक गर्म वर्षों में शामिल किया गया। उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में जून, जुलाई और अगस्त के दौरान असाधारण गर्मी देखने को मिली, जबकि दूसरी ओर कई क्षेत्रों में भारी बारिश और विनाशकारी तूफानों ने तबाही मचाई।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के पीछे मानव गतिविधियों की बड़ी भूमिका है। ग्रीनहाउस गैसों का लगातार बढ़ता उत्सर्जन, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, आवश्यकता से अधिक भूजल दोहन, पहाड़ों के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़, नदियों के किनारे अनियोजित एवं अवैध निर्माण तथा प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन प्रकृति के साथ सीधा अन्याय है।

उन्होंने वर्ष 2023 में गुजरात और राजस्थान में चक्रवात से हुई तबाही, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और दिल्ली सहित कई क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश तथा बाढ़ और भूस्खलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने एक बार फिर मानव को प्रकृति के सामने अपनी सीमाओं का एहसास कराया। हिमाचल प्रदेश में जुलाई और अगस्त के दौरान आई आपदाओं ने वर्ष 2013 की केदारनाथ त्रासदी की भयावह यादें ताजा कर दी थीं। वहीं, उत्तराखंड में भूस्खलन और अतिवृष्टि के कारण चारधाम यात्रा तक प्रभावित हुई।

अशोक सिंह ‘दद्दा’ ने कहा कि 2026 में भी एशिया के विभिन्न क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। बड़े पैमाने पर जन-धन की क्षति, भवनों, पुलों और सड़कों का क्षतिग्रस्त होना इस बात का संकेत है कि प्रकृति के साथ लगातार हो रही छेड़छाड़ को अब गंभीरता से लेने का समय आ गया है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रकृति के संतुलन को बिगाड़कर मानव स्वयं अपने भविष्य को संकट में डाल रहा है। यदि अभी भी पेड़ों की कटाई, जल दोहन, पहाड़ों के अनियोजित दोहन और प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगाया गया तो आने वाले समय में प्राकृतिक आपदाओं का स्वरूप और अधिक भयावह हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति किसी एक व्यक्ति, संस्था या सरकार की नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति की साझा विरासत है। इसलिए इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी हम सभी की है। भावी पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए आज से ही प्रकृति के प्रति अपनी सोच और जीवनशैली में बदलाव लाना होगा।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने देशवासियों से अपील की कि अधिक से अधिक पौधरोपण करें, जल संरक्षण को प्राथमिकता दें, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें और पर्यावरण संरक्षण के लिए समाज में जागरूकता फैलाएं।

एसोसिएशन ने घोषणा की कि प्रकृति संरक्षण को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके।

— अशोक सिंह ‘दद्दा’

स्वतंत्र लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार

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