सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद बिंद
स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के दर्शन-आशीर्वचन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे, 'जय गुरुदेव' के जयघोष से गूंजा पूरा आश्रम
सक्तेशगढ़ (मिर्जापुर)। गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर सक्तेशगढ़ स्थित परमहंस आश्रम में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के दर्शन एवं आशीर्वचन प्राप्त करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु आश्रम पहुंचे। पूरे आश्रम परिसर में "जय गुरुदेव" और गुरु वंदना के जयघोष लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने दर्शन करने के साथ-साथ विशाल भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
गुरुपूर्णिमा के अवसर पर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु सुबह से ही स्वामी अड़गड़ानंद महाराज के दर्शन के लिए उत्सुक दिखाई दिए। प्रातः लगभग सात बजे स्वामी जी अपने विश्राम कक्ष से निकलकर प्रवचन स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने अपने शिष्यों एवं श्रद्धालुओं को दर्शन दिए तथा आशीर्वचन प्रदान किए। उनके दर्शन के लिए महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं की अलग-अलग कतारें बनाई गई थीं, जिससे व्यवस्था सुचारु बनी रही।
अपने आशीर्वचन में स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध अटूट एवं पवित्र होता है। गुरु के बिना सच्चे ज्ञान तथा ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है। गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि शिष्य के जीवन को सही दिशा, संस्कार और आत्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रदान करते हैं।
सत्संग के दौरान उन्होंने गुरुपूर्णिमा के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है। महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों का विभाजन किया तथा महाभारत एवं पुराणों की रचना की। इसी कारण उन्हें मानव जाति का प्रथम गुरु माना जाता है और गुरुपूर्णिमा को 'व्यास पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है।
पूजा-अर्चना के उपरांत आश्रम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं का कहना था कि गुरु के दर्शन और आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास तथा आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुचारु व्यवस्था के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे। वाहनों को आश्रम से लगभग दो किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया था तथा आवश्यक स्थानों पर यातायात डायवर्ट किया गया। आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस बल, ट्रैफिक पुलिस, स्वास्थ्य विभाग की टीम, बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, सफाई कर्मी तथा आश्रम के सेवादार लगातार मुस्तैद रहे। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित एवं शांतिपूर्ण बनी रही।

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