सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर राम पुकार प्रसाद
पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर काव्य संध्या में कविताओं ने बांधा समां, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकारों से गूंजा अधिवक्ता भवन
सोनभद्र। पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के उपलक्ष्य में साहित्य दीप संस्थान चुर्क के तत्वावधान में शुक्रवार शाम रॉबर्ट्सगंज कचहरी परिसर स्थित अधिवक्ता भवन में काव्य संध्या का आयोजन हुआ। कवियों ने राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकार, व्यवस्था और समसामयिक विषयों पर रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ गीतकार ईश्वर विरागी ने की। मुख्य अतिथि कमलेश सिंह खांबे और विशिष्ट अतिथि अजय चतुर्वेदी कक्का ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम की वाणी वंदना से काव्य संध्या का शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी के प्रमुख प्रद्युम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने अपनी पंक्तियों— “फूल से भी कोमल, पाहन से सख्त थे, अंत:करण विशुद्ध था, भारत के भक्त थे...” के माध्यम से पं. दीनदयाल उपाध्याय को काव्यांजलि दी। उनकी रचना पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
अजय चतुर्वेदी कक्का ने ओजपूर्ण अंदाज में “कत्ल करना है मेरा तो सर है हाजिर, कीजिए” सुनाकर वाहवाही लूटी। वहीं दिलीप सिंह दीपक ने “मोहब्बत की जमीं है, ऐ इसका सम्मान मत बेचो, चंद सिक्कों के लिए अपना ईमान मत बेचो” के जरिए सामाजिक चेतना का संदेश दिया।
सुधाकर पांडेय स्वदेश प्रेम ने “तिरंगे में सजी अर्थी, बजे धुन राष्ट्रगीतों की, जनाजा जब मेरा निकले वतन के वास्ते निकले” सुनाकर राष्ट्रभक्ति की हुंकार भरी। शायर अशोक तिवारी एडवोकेट ने गंभीर शायरी से श्रोताओं को प्रभावित किया। सोन साहित्य संगम के राकेश शरण मिश्र एडवोकेट ने काव्य पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
ओज कवि प्रभात सिंह चंदेल ने देश और सीमा पर तैनात जवानों के संदर्भ में रचना सुनाकर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया। वहीं दिवाकर द्विवेदी ‘मेघ’ ने हास्य-व्यंग्य के तीखे कटाक्षों के माध्यम से महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर आम आदमी की पीड़ा को स्वर दिया।
मुख्य अतिथि कमलेश सिंह खांबे ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों, अंत्योदय और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने की अवधारणा पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता कर रहे ईश्वर विरागी ने “जब तलक है रक्त की एक बूंद तन में, ऐ हिंद हम तुझको कभी झुकने न देंगे” सुनाकर काव्य संध्या को राष्ट्रभक्ति के शिखर पर पहुंचा दिया।
इस अवसर पर विवेक चतुर्वेदी, मदन चौबे एडवोकेट, दयानंद दयालू, सुशील मिश्रा समेत अन्य कवियों ने भी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में जयशंकर त्रिपाठी एडवोकेट, देवानंद पांडेय एडवोकेट, त्रिपुरारी मिश्रा एडवोकेट, ऋषभ त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

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