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खनन पट्टे में कथित फर्जीवाड़े का आरोपी मुंबई से गिरफ्तार

 सोन की आवाज न्यूज़ रिपोर्टर राम पुकार प्रसाद 

फर्जी हस्ताक्षर-कूटरचित दस्तावेजों के आरोप में ओबरा पुलिस व एसओजी की कार्रवाई, कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेजा गया


सोनभद्र/ओबरा।
खनन पट्टे से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामले में लंबे समय से वांछित चल रहे खनन कारोबारी इश्तियाक खान को ओबरा पुलिस और एसओजी/सर्विलांस की संयुक्त टीम ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी 9 सितंबर को मुंबई के चूनाभट्टी थाना क्षेत्र स्थित प्रियदर्शनी बस स्टॉप के पास से की गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सोनभद्र लाकर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार इश्तियाक खान पुत्र सुल्तान खान के खिलाफ थाना ओबरा में मु0अ0सं0 153/2025 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज है। पुलिस का आरोप है कि खनन पट्टे से संबंधित दस्तावेजों में कथित हेराफेरी, फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल के मामले में आरोपी की तलाश की जा रही थी।

10 साल के खनन पट्टे से जुड़ा है विवाद

मामले के वादी सुधीर कुमार श्रीवास्तव के अनुसार उनकी पत्नी रिंकी श्रीवास्तव के नाम ग्राम बिल्ली मारकुंडी में गिट्टी/बोल्डर (डोलोस्टोन) का 10 वर्षीय खनन पट्टा 7 अक्टूबर 2023 से 6 अक्टूबर 2033 तक स्वीकृत एवं पंजीकृत है।

आरोप है कि पट्टे से संबंधित विभागीय एवं अभिलेखीय कार्यवाही की जिम्मेदारी इश्तियाक खान को दी गई थी। वादी का आरोप है कि बाद में पट्टाधारक के नाम से होने वाली औपचारिकताओं को कथित तौर पर मेसर्स राधिका इंडस्ट्रीज के नाम से संचालित कराया गया।

आरोपों में सरकारी विभागों और बैंकों में कथित फर्जी हस्ताक्षर, कूटरचित शपथ पत्र एवं आवेदन तैयार करने, खनन पट्टे के हिसाब-किताब में कथित हेराफेरी और धन के गबन की बातें भी शामिल हैं। वादी ने बातचीत के दौरान कथित गाली-गलौज और धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

ओबरा से मुंबई तक पुलिस की तलाश

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही थी। पुलिस के मुताबिक सर्विलांस से मिले सुराग के आधार पर इश्तियाक खान के मुंबई के चूनाभट्टी क्षेत्र में मौजूद होने की सूचना मिली। इसके बाद ओबरा पुलिस और एसओजी/सर्विलांस की संयुक्त टीम मुंबई पहुंची और घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर खनन पट्टे से जुड़े दस्तावेज, कथित फर्जी हस्ताक्षर, बैंकिंग लेन-देन और विभागीय अभिलेखों की जांच इस पूरे प्रकरण की अहम कड़ी मानी जा रही है।

कोर्ट परिसर में वकील की दलील से मामला और गरमाया

इधर न्यायालय परिसर में आरोपी के अधिवक्ता ने मीडिया से बातचीत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले को कारोबारी साझेदारों के बीच का विवाद बताया। अधिवक्ता का दावा है कि संबंधित विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष भी मामला गया था और उसे प्रथम दृष्टया सिविल प्रकृति का विवाद माना गया था। वकील ने पुलिस की जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई।

वहीं दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी की कार्रवाई विधिक प्रक्रिया के तहत की गई है।


अब जांच के केंद्र में कई गंभीर सवाल

इस पूरे प्रकरण में अब सबसे अहम सवाल यह है कि खनन पट्टे से जुड़े दस्तावेजों में कथित तौर पर किस स्तर पर हेराफेरी हुई? 

सरकारी विभागों और बैंकों में इस्तेमाल बताए जा रहे दस्तावेजों की वास्तविकता क्या है? 

खनन पट्टे से होने वाले लेन-देन का हिसाब क्या है? 

और यदि दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे?

इन सवालों का जवाब पुलिस विवेचना और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही सामने आएगा।

खनन कारोबार से जुड़े पुराने विवाद भी चर्चा में

इश्तियाक खान का नाम पूर्व में भी खनन कारोबार से जुड़े विभिन्न विवादों और शिकायतों के संदर्भ में चर्चा में रहा है। उपलब्ध आरोपों में कथित फर्जी दस्तावेज, जाली हस्ताक्षर, ई-पास/एमएम-11 से संबंधित अनियमितताएं, कथित अवैध खनन और अन्य कारोबारी विवाद शामिल बताए जाते रहे हैं। हालांकि इनमें से अलग-अलग मामलों की कानूनी स्थिति अलग हो सकती है और कुछ मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाए जाने की बात भी सामने आती रही है। इसलिए प्रत्येक मामले की वर्तमान स्थिति संबंधित अभिलेखों से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।

राजनीतिक पहुंच और खनन कारोबार को लेकर भी चर्चाएं

स्थानीय स्तर पर इश्तियाक खान की राजनीतिक और कारोबारी सक्रियता को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। विभिन्न राजनीतिक नेताओं से उनके संबंधों की तस्वीरें और चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि किसी राजनीतिक संबंध को अपने आप में किसी आपराधिक मामले में संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अब निगाहें पुलिस विवेचना पर टिकी हैं कि खनन पट्टे से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की परतें कहां तक पहुंचती हैं और दस्तावेजों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

इनकी रही भूमिका

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय अनिल कुमार के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी ओबरा प्रभात राय के पर्यवेक्षण में की गई।

गिरफ्तारी टीम में निरीक्षक नागेश कुमार सिंह, प्रभारी सर्विलांस/एसओजी, उपनिरीक्षक अमित कुमार सिंह, थाना ओबरा तथा कांस्टेबल सत्यम पाण्डेय, सर्विलांस/एसओजी शामिल रहे।

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