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शमशान भूमि पर चार माह बाद भी अतिक्रमण बरकरार,तहसीलदार के बेदखली आदेश पर अमल नहीं—डीएम से पुलिस बल के साथ कार्रवाई की मांग

 सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद बिंद 


घोरावल, सोनभद्र।
शासन के एंटी भू-माफिया अभियान और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद तहसील घोरावल में शमशान की सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है।

प्रकरण का विवरण:मौजा बेलाटाड़, परगना बड़हर, तहसील घोरावल की आराजी संख्या 18 रकबा 0.1260 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में शमशान श्रेणी 6-3 के रूप में दर्ज है। यह भूमि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 77(1)(घ) के अनुसार किसी भी दशा में आवंटन योग्य नहीं है।

उक्त आराजी के 0.0060 हेक्टेयर भाग पर विपक्षी रविशंकर त्रिपाठी पुत्र मंगला प्रसाद, निवासी बेलाटाड़ द्वारा अवैध रूप से स्थायी निर्माण (शौचालय/मकान) कर अतिक्रमण कर लिया गया था।

क्षेत्रीय लेखपाल की आख्या दिनांक 20/01/2026 के आधार पर राज्य बनाम रविशंकर त्रिपाठी, कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या T202616660300622, वाद संख्या 622/2026, अंतर्गत धारा 67 उ.प्र. राजस्व संहिता के तहत वाद पंजीकृत हुआ।

माननीय न्यायालय सहायक कलेक्टर/तहसीलदार घोरावल, श्री प्रवीण सिंह जी द्वारा नियमानुसार नोटिस व सुनवाई के उपरांत दिनांक 28/04/2026 को अंतिम आदेश पारित किया गया। आदेश में विपक्षी को बेदखल करने, 2280/- रुपये जुर्माना और 5000/- रुपये निष्पादन व्यय वसूलने तथा 49-ग नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर बेदखली कराकर आख्या प्रस्तुत करने हेतु राजस्व निरीक्षक को निर्देशित किया गया था।

4 माह बाद भी अनुपालन नहीं:इस संबंध में ग्राम सभा बेलाटाड़ के वार्ड नंबर 09 से निर्वाचित सदस्य एवं व्यापार मंडल किसान संघ जनपद सोनभद्र के जिला सचिव श्री हरिवंश उर्फ राजू केशरी ने बताया कि आदेश पारित हुए 4 माह से अधिक समय बीत चुका है, परन्तु आज दिनांक 27/08/2026 तक भी मौके से अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। विपक्षी का निर्माण यथावत बना हुआ है। इस संबंध में जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) एवं एंटी भू-माफिया पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है।

कानूनी स्थिति:श्री केशरी ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने Jagpal Singh & Others Vs State of Punjab & Others AIR 2011 SC 1123 में सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि शमशान, तालाब, पोखर, चारागाह जैसी ग्राम समाज की सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए, इसे नियमित नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार Hinch Lal Tiwari Vs Kamla Devi 2001 (6) SCC 496 में कहा गया है कि ऐसे अतिक्रमणकर्ता को किसी सहानुभूति का अधिकार नहीं।

माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने भी विभिन्न जनहित याचिकाओं में निर्देश दिया है कि धारा 67 के आदेश के अनुपालन में लापरवाही बरतने वाले लेखपाल/राजस्व निरीक्षक के विरुद्ध कार्रवाई की जाए और जिलाधिकारी धारा 67(4) के तहत पुलिस बल का प्रयोग कर अतिक्रमण हटवाना सुनिश्चित करें।

मांग:

1. जिलाधिकारी सोनभद्र तहसीलदार घोरावल के दिनांक 28/04/2026 के आदेश का पुलिस बल की सहायता से तत्काल अनुपालन कराकर शमशान की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करायें।

2. न्यायिक आदेश के 4 माह बाद भी अनुपालन न करने वाले संबंधित राजस्व निरीक्षक/लेखपाल की लापरवाही की जांच कर कार्रवाई की जाये।

3. विपक्षी से अर्थदण्ड व निष्पादन व्यय की वसूली सुनिश्चित की जाये।

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