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अनपरा तापीय परियोजना आवासीय परिसर के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में धड़ल्ले से जारी अवैध निर्माण, सिविल प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल

 

सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद 


अनपरा (सोनभद्र)।
अनपरा तापीय परियोजना के आवासीय परिसर स्थित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध निर्माण को लेकर चर्चा में है। ताजा मामला कॉम्प्लेक्स में संचालित एक डेयरी की दुकान का है, जहां परियोजना प्रबंधन के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए पुन अवैध निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। खास बात यह है कि इस पूरे मामले में सिविल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और मूक सहमति पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय सूत्रों और जागरूक कर्मियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस डेयरी की दुकान में पहले भी अवैध तरीके से निर्माण कार्य कराने का प्रयास किया गया था। उस दौरान मामला संज्ञान में आने पर परियोजना प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए काम को रुकवा दिया था। लेकिन, कुछ ही दिनों के अंतराल के बाद आज एक बार फिर प्रशासनिक दावों को दरकिनार कर निर्माण कार्य धड़ल्ले से शुरू कर दिया गया है। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या इस नए निर्माण की भनक परियोजना प्रबंधक को है या फिर अधिकारी जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंदे बैठे हैं। परिसर के भीतर चल रहे इस खेल का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि परियोजना क्षेत्र में पूर्व में कई दुकानें ठेले (वेंडर) के नाम पर आवंटित की गई थीं। नियमतः यह अस्थाई व्यवस्था थी, लेकिन रसूख और सांठगांठ के बल पर आज एक ठेले के नाम वाले आवंटन पर बड़ी सी डेयरी का संचालन किया जा रहा है। इतना ही नहीं, वर्तमान में डेयरी के ठीक पीछे भारी मात्रा में भवन निर्माण सामग्री (बालू, गिट्टी, सीमेंट आदि) गिराई गई है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि यहाँ बड़े पैमाने पर पक्का निर्माण करने की तैयारी है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कॉलोनी परिसर के सजग निवासियों और विद्युत कर्मियों में भारी आक्रोश है। वरिष्ठ विद्युत कर्मी नेता प्रशांत उपाध्याय एवं सुजीत सोनी ने इस तरह के अवैध निर्माण पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की है। कॉलोनी परिसर में इस तरह का अवैध निर्माण पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है। बिना सिविल प्रबंधन की मिलीभगत या शह के इतने बड़े पैमाने पर सामग्री गिराकर निर्माण करना असंभव है। अगर सिविल विभाग इस अवैध निर्माण को तत्काल मलबे समेत नहीं हटवाता और काम नहीं रोकता, तो यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि दाल में कुछ काला है। और पर्दे के पीछे मोटी साठगांठ की गई है। विद्युत कर्मी नेताओं ने सिविल प्रबंधन को चेताते हुए अपील की है कि आवासीय कॉलोनी परिसर को भ्रष्टाचार और अवैध कब्जाधारियों का प्रमुख केंद्र न बनने दिया जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि स्थानीय प्रबंधन ने इस पर तुरंत कड़ा रुख अख्तियार नहीं किया, तो इस पूरे मामले की लिखित शिकायत साक्ष्यों के साथ ऊर्जा प्रबंधन, लखनऊ (मुख्यालय) से की जाएगी, ताकि कॉलोनी की भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखा जा सके और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके। अब देखना यह होगा कि इस मुखर विरोध के बाद अनपरा तापीय परियोजना का सिविल और उच्च प्रबंधन इस अवैध निर्माण पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर भ्रष्टाचार के इस खेल को यूं ही हवा मिलती रहेगी।

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