*परोपकार और परमार्थ से ही धन का मूल्य निर्धारित होता है। धन उचित दिशा में व्यय किया जाता है तो वह सृजन का कारण बनता है और वही धन यदि गलत दिशा में प्रयोग किया जाता है तो विध्वंस का भी कारण बन जाता है। धन कमाना बहुत अच्छी बात है, लेकिन उसका सही दिशा में उपयोग हो ये भी हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। धन को जिस मार्ग में व्यय किया जायेगा, उसी अनुरूप उसके मूल्य का भी निर्धारण होगा।*
*दीन दुःखियों के दुःखों को मिटाने के लिए, भूखों को भोजन खिलाने के लिए, प्यासों को पानी पिलाने के लिए और धर्म को बचाने के लिए व्यय किये गये धन का मूल्य, किसी को सताने के लिए, अनीति-अनाचार को बढ़ाने के लिए और व्यसनों में उड़ाने के लिए उपयोग किये गये धन से कई गुना श्रेष्ठ है।*
*धन कमाने के लिए लालायित रहो, लेकिन धन का श्रेष्ठ मार्ग में उपयोग हो, इसके लिए भी सावधान रहने की आवश्यकता है।*
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रामआश्रय बिंद पत्रकार
सोन की आवाज न्यूज़ प्रधान संपादक
*वंदेभारत । शुभ दिवस*
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