सोन की आवाज न्यूज़
*मधुर वाणी से ही मधुर सम्बंधों के फूल खिलते हैं। बगीचे की मिट्टी कितनी ही अच्छी हो, उसमें खाद कितना ही अच्छा डाला जाये, लेकिन पानी यदि खारा है तो उसमें फूल नहीं खिल सकते हैं। ऐसे ही आपके कर्म अच्छे हों, हृदय के भाव भी निर्मल हों, लेकिन वाणी कठोर हो तो जीवन की वाटिका में मधुर सम्बंधों के पुष्प भी नहीं खिल सकते हैं। सम्बन्धों की मधुरता के लिए भाव की पवित्रता के साथ-साथ वाणी की मृदुता भी अनिवार्य है।*
*वाणी का संयम भी जीवन की एक साधना ही है। खेतों में मीठा पानी और जीवन में मीठी वाणी का बड़ा महत्व है। खारा पानी खेती को बर्बाद कर देता है तो खारी वाणी से सम्बंध बर्बाद हो जाते हैं।*
*जहाँ वाणी की मिठास होती है, वहाँ परस्पर सम्बन्धों की मधुर फसलें भी स्वतः लहलहा उठती हैं। सम्बन्धों के जुड़ाव में अथवा सम्बंधों के बिखराव में वाणी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आप मीठा बोलना तो सीखिए, सम्बन्ध निभाना स्वतः आ जायेगा।*
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रामआश्रय बिंद पत्रकार
सोन की आवाज न्यूज़ प्रधान संपादक
9554175344,9335932664
*वंदेभारत । शुभ दिवस*
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