ब्यूरो रिपोर्ट: सोन की आवाज न्यूज़
विशेष रिपोर्ट: शेख टीपू सुल्तान, क्राइम ब्यूरो चीफ (वाराणसी मंडल)
पारंपरिक भारतीय शिल्पकला से जुड़े छात्र-छात्राएं; प्रसिद्ध शिल्पियों ने लाइव डेमो के जरिए स्वरोजगार के दिखाए रास्ते
चंदौली / वाराणसी मंडल:
हस्तशिल्प सेवा केंद्र, कार्यालय विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार, वाराणसी के तत्वावधान में रामनगर रोड, चंदौली स्थित एस. ए. एच. एजुकेशनल सेंटर में तीन दिवसीय (10.08.2026 से 12.08.2026) "शिल्प प्रदर्शन सह जागरूकता कार्यक्रम" का भव्य व सफल आयोजन किया गया।
इस आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य युवा पीढ़ी व छात्र-छात्राओं को भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा के प्रति जागरूक करना, उन्हें शिल्प निर्माण की कला सिखाना तथा भविष्य में आत्मनिर्भरता व स्वरोजगार के अवसरों के लिए प्रेरित करना रहा।
सिद्धहस्त शिल्पियों द्वारा लाइव प्रदर्शन
कार्यशाला के दौरान विभिन्न विधाओं के 4 राष्ट्रीय स्तर के सिद्धहस्त शिल्पियों द्वारा विद्यार्थियों के सामने लाइव प्रदर्शन (Live Demo) कर शिल्प की बारीकियों, निर्माण प्रक्रिया और उनके व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत व्याख्या की गई:
गुफराम सिद्दीकी – ब्रश पेंटिंग (Brush Painting)
यास्मीन – जरी-जरदोजी (Zari-Zardozi)
शिखा प्रजापति – टेराकोटा कला (Terracotta)
बाबर अली – जूट वॉल हैंगिंग (Jute Wall Hanging)
छात्रों ने इन विधाओं को बेहद उत्साह के साथ देखा और पारंपरिक शिल्पकला के व्यावहारिक महत्व को समझा।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति व संबोधन
कार्यक्रम का संचालन एवं अध्यक्षता श्री एस. के. सिंह (वरिष्ठ सहायक निदेशक - हस्तशिल्प, हस्तशिल्प सेवा केंद्र, वाराणसी) द्वारा की गई।
इस अवसर पर मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं:
प्रोफेसर श्री सैय्यद हसन कासिम, विभागाध्यक्ष (HOD), मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय
श्री हाजी वसीम अहमद, निदेशक, एस. ए. एच. एजुकेशनल सेंटर
श्रीमती सारिका सिंह, प्राचार्या, CBSE
श्री के. डी. त्रिपाठी, प्राचार्य, इंटर कॉलेज
श्री भवानी प्रसाद, कार्यालय प्रभारी अधिकारी
अतिथियों ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि हस्तशिल्प केवल एक कला नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और स्वावलंबन का एक सशक्त माध्यम है।
समन्वयक श्री तनवीर आलम के अथक प्रयासों से कार्यक्रम हुआ संपन्न
इस तीन दिवसीय जागरूकता महाअभियान के सफल क्रियान्वयन और कुशल प्रबंधन में कार्यक्रम समन्वयक श्री तनवीर आलम (अमन सेवा समिति) की भूमिका सर्वोपरि रही। श्री तनवीर आलम के अथक परिश्रम, सटीक संयोजन और लगातार किए गए प्रयासों की सभी अतिथियों, शिल्पियों एवं विद्यालय प्रबंधन ने खुले दिल से प्रशंसा की।
समापन:
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ सहायक निदेशक द्वारा सभी अतिथियों, शिल्पकारों, विद्यालय परिवार और विशेष रूप से श्री तनवीर आलम का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के विधिवत समापन की घोषणा की गई।





















Post a Comment