सोन की आवाज न्यूज़ मंडल ब्यूरो चीफ जगरनाथ प्रसाद बिंद
सोनभद्र। जिले में विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और स्थानीय समस्याओं की अनदेखी के खिलाफ विंध्य ब्रिगेड ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन की ओर से जिलाधिकारी सोनभद्र को पांच सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए जनहित से जुड़े मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। मांगें पूरी न होने पर कलेक्ट्रेट परिसर में बैनर तले अनिश्चितकालीन उपवास करने की चेतावनी भी दी गई है।
विंध्य ब्रिगेड के संयोजक एवं पूर्व प्रमुख सदस्य सोनभद्र रमेश कुमार मिश्रा ने मांगपत्र में कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाना लोकतंत्र का गला घोंटने के समान है। संगठन ने गांव, गरीब, किसान, जल-जंगल-जमीन और प्रकृति की रक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
मांगपत्र में कहा गया है कि जिले में हिडाल्को और अल्ट्राटेक जैसी बड़ी कंपनियां स्थापित हैं, लेकिन सवाल यह है कि इनके आने के बावजूद कितने वनवासी और स्थानीय युवाओं का वास्तविक विकास हुआ। विंध्य क्षेत्र के विस्थापित और प्रभावित लोगों को आज भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन ने वन क्षेत्रों और प्राकृतिक भूमि पर उद्योगों के विस्तार को लेकर भी चिंता जताई है। मांगपत्र में कहा गया कि विकास के नाम पर प्रकृति की गोद उजाड़ना उचित नहीं है। वन और पर्यावरण की कीमत पर किया गया विकास भविष्य में गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
*खाद की कालाबाजारी और सिंचाई व्यवस्था पर भी उठाए सवाल*
विंध्य ब्रिगेड ने डीएपी और यूरिया खाद की कथित कालाबाजारी, सुपर खाद में पत्थर एवं भस्सी पाउडर की मिलावट और किसानों की समस्याओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। संगठन ने कहा कि किसान पहले से ही खाद की समस्या,
कालाबाजारी और मिलावट से परेशान हैं। अधिकारियों और व्यापारियों की कथित मिलीभगत से किसानों को नुकसान हो रहा है, इसलिए उन्हें तत्काल राहत दी जाए।
मांगपत्र में जिला खनिज निधि (DMF) के धन से सिंचाई के संसाधनों को मजबूत करने की मांग की गई। संगठन ने माइनर, गुल और झालों की तत्काल मरम्मत कराने तथा उन्हें जवाबदेह बनाए जाने की मांग की है।
इसके अलावा स्थानीय कारखानों में योग्य स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और स्थानीय युवाओं का समायोजन कराने की मांग भी रखी गई है।
विंध्य ब्रिगेड ने चेतावनी दी कि यदि जनहित से जुड़ी इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान नहीं किया गया तो मंडलायुक्त कार्यालय से लेकर दिल्ली तक आंदोलन और उपवास का रास्ता अपनाया जाएगा। संगठन ने कहा कि जल-जंगल-जमीन और स्थानीय जनता के अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती से जारी रहेगी।
रमेश कुमार मिश्रा
संयोजक, विंध्य ब्रिगेड एवं पूर्व प्रमुख सदस्य, सोनभद्र






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