जल, जंगल और जमीन पर संकट: मजदूर-किसानों के अधिकारों की लड़ाई तेज करने का आह्वान
कर्मयोगी विचार क्रांति अभियान के तहत युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन पर लगातार बढ़ते संकट से मजदूर, किसान और आदिवासी समाज के सामने आने वाले समय में भारी चुनौतियां खड़ी होने वाली हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्राकृतिक संसाधनों को आम जनता से दूर कर चुनिंदा लोगों और बड़ी कंपनियों के हवाले किया जा रहा है, जिससे गरीब और मेहनतकश वर्ग का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई, जमीनों का अधिग्रहण और जल स्रोतों पर बढ़ते नियंत्रण के कारण आने वाली पीढ़ियों को पानी और जमीन जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। यदि समय रहते मजदूर, किसान और आदिवासी समाज एकजुट नहीं हुआ तो भविष्य में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
युवा क्रांतिकारी संतोष ठाकुर ने लोगों से जागरूक होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्वांचल और सोनांचल राज्य की मांग केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य, रोजगार, शिक्षा और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा का सवाल है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि मजदूर, किसान और आदिवासी समाज संगठित होकर अपने बच्चों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए संघर्ष करे, अन्यथा सरकार की नीतियां आम जनता को कहीं का नहीं छोड़ेंगी।
*“जल, जंगल और जमीन बचाओ — अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित बनाओ।”*



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